प्राइस टू बुक वैल्यू अनुपात
प्राइस टू बुक वैल्यू अनुपात को कंपनी का शुद्ध संपत्ति मूल्य भी कहा जाता है। आसान भाषा में समझें, तो यह कुल संपत्ति माइनस अमूर्त संपत्ति और देनदारियों के रूप में गणना कर निकलता है। जिन कंपनियों का प्राइस टू बुक वैल्यू अनुपात कम होता है, उन्हें कम मूल्यवान माना जाता है।
प्राइस टू बुक वैल्यू अनुपात = (प्रति शेयर बाजार मूल्य/प्रति शेयर बुक वैल्यू)

IPO में अलॉट हुए शेयर की खरीद-फरोख्त

फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस क्या हैं? निवेश करने से पहले आसान भाषा में समझें

फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस क्या हैं? निवेश करने से पहले आसान भाषा में समझें

हर कोई अपने निवेश से मुनाफा कमाना चाहता है. मार्केट (बाजार) में निवेश के कई विकल्प मौजूद हैं. आज हम वित्तीय साधनों (फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट) के बारे में बात करेंगे, जिन्हें फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस के तौर पर जाना जाता है. फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस के जरिए न केवल शेयरों में, बल्कि सोने, चांदी, एग्रीकल्चर कमोडिटी और कच्चे तेल (क्रड ऑयल) सहित कई अन्य डेरिवेटिव सेगमेंट में भी कारोबार करके पैसा कमाया जा सकता है. फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस को समझने से पहले उस मार्केट को समझना जरूरी है, जिसमें ये प्रोडक्ट्स खरीदे और बेचे जाते हैं.

इन दोनों प्रोडक्ट का डेरिवेटिव मार्केट में कारोबार होता है. ऐसे कई प्लेटफॉर्म हैं, जहां से ये ट्रेड किए जा सकते हैं. अगर आप भी इसमें शुरुआत करना चाहते हैं, तो 5paisa.com (https://bit.ly/3RreGqO) वह प्लेटफॉर्म है जो डेरिवेटिव ट्रेडिंग में आपका सफर शुरू करने में मदद कर सकता है.

डेरिवेटिव्स क्या होते हैं?

डेरिवेटिव वित्तीय साधन (फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट) हैं, जो एक अंतर्निहित परिसंपत्ति (निवेश करने से पहले आसान भाषा में समझें अंडरलाइंग एसेट) या बेंचमार्क से अपनी कीमत (वैल्यू) हासिल करते हैं. उदाहरण के लिए, स्टॉक, बॉन्ड, करेंसी, कमोडिटी और मार्केट इंडेक्स डेरिवेटिव में इस्तेमाल किए जाने वाले कॉमन एसेट हैं. अंतर्निहित परिसंपत्ति (अंडरलाइंग एसेट) की कीमत बाजार की स्थितियों के मुताबिक बदलती रहती है. मुख्य रूप से चार तरह के डेरिवेटिव कॉन्ट्रेक्ट हैं – फ्यूचर (वायदा), फॉरवर्ड, ऑप्शन और स्वैप.

फ्यूचर्स निवेश करने से पहले आसान भाषा में समझें कॉन्ट्रैक्ट के जरिए खरीदार (या विक्रेता) भविष्य में एक पूर्व निर्धारित तिथि पर एक पूर्व निर्धारित मूल्य पर संपत्ति खरीद या बेच सकता है. वायदा कारोबार (फ्यूचर ट्रेडिंग) करने वाले दोनों पक्ष अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) को पूरा करने के लिए बाध्य होते हैं. इन अनुबंधों का स्टॉक एक्सचेंज में कारोबार होता है. वायदा अनुबंध की कीमत अनुबंध खत्म होने तक मार्केट के हिसाब से बदलती रहती है.

इन्वेस्टमेंट की शुरुआत करने से पहले जानें ये बड़ी गलतियां, निवेश करने से पहले आसान भाषा में समझें जिसे करने से हमेशा बचते हैं बड़े निवेशक

ANISH KUMAR SINGH

Written By: ANISH KUMAR SINGH @AnishSonevanshi
Updated on: December 25, 2022 10:28 IST

इन्वेस्टमेंट की शुरुआत करने से पहले जानें ये गलतियां- India TV Hindi

Photo:FILE इन्वेस्टमेंट की शुरुआत करने से पहले जानें ये गलतियां

आमतौर पर नए नए निवेशक ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट में अंतर नहीं समझ पाते हैं, Mutual Fund और शेयर मार्केट में बेसिक अंतर क्या है, उन्हें नहीं पता होता। ऐसे लोग इन्वेस्टमेंट के नाम पर सीधे शेयर मार्केट में कूद पड़ते हैं। दूसरे लोगों की राय पर कोई भी शेयर खरीद लेते हैं, 2-4 दिन तक थोड़ा बहुत प्रॉफिट में रहते हैं और फिर घाटे में चले जाते हैं। फिर इन्वेस्टमेंट के नाम पर कान पकड़ लेते हैं। उन्हें ये पता ही नहीं कि वो इन्वेस्टमेंट नहीं सट्टा लगा रहे थे।

आखिर 90% लोग अपने पैसे क्यों गवां देते हैं

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ऐसे लोग शेयर को उस समय ख़रीदते हैं जब वो शेयर ख़ूब चर्चा में रहता है, उसकी प्राइस बढ़ रही होती है। ऐसे लोग ट्रेडर्स माइंडसेट और इन्वेस्टर्स माइंडसेट को बिना समझे भागते घोड़े पर बोली लगाते हैं यानी तेज़ी से बढ़ रहे शेयर को ख़रीदते जाते हैं और जब उस शेयर में बिकवाली शुरू होती है, जब ट्रेडर्स अपने सौदे काटने(Square off) निवेश करने से पहले आसान भाषा में समझें करने लगते हैं तब वो शेयर ऐसे धड़ाम से नीचे गिरता है कि आपको संभलने निवेश करने से पहले आसान भाषा में समझें तक का मौका नहीं मिलता और रही सही कसर ऑपरेटर्स पूरी कर देते हैं। शेयर बाज़ार रूपी समंदर में ऑपरेटर्स वो बड़ी मछलियां हैं जो हमेशा छोटी मछलियों के शिकार के फिराक में रहते हैं। वो चाहते ही हैं कि बाज़ार में नौसिखिये लोग अपनी किस्मत आजमाने आएं और उनकी पूरी जमा पूंजी वो चट कर जाएं। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि आखिर क्या करें।

90% लोग अपने पैसे गवां देते हैं

शेयर मार्केट से नहीं Mutual Fund से शुरुआत करें

अपनी इन्वेस्टमेंट की जर्नी आप Mutual Fund से स्टार्ट करें। अब आप कहेंगे Mutual Fund का इन्वेस्टमेंट भी तो ज़्यादातर शेयर मार्केट में ही होता है, वो शेयर मार्केट से अलग कैसे है। तो इसका जवाब ये है कि Mutual Fund में Fund मैनेजर होते हैं (एक्टिव Fund में) जो काफी अनुभवी होते हैं। वह आपके पैसे को अपने हिसाब से अलग अलग शेयर्स में लगाते हैं और इसके लिए आपसे कुछ पैसे भी लिए जाते हैं। इस तरह के इन्वेस्टमेंट में रिस्क कम हो जाता है। हालांकि Passive Fund (Index Fund) में आपको ये चार्ज भी नहीं लगता है, क्योंकि उसमें कोई Fund मैनेजर नहीं होता। दुनिया के सबसे बड़े निवेशक वॉरेन बफ़ेट ने भी इंडेक्स Fund को एक्टिव Fund से अच्छा माना है। इसे उन्होंने बाकायदा सिद्ध करके भी दिखाया है।

शेयर मार्केट से नहीं mutual fund से शुरुआत करें

समझें IPO का पूरा गणित, ऐसे कर सकते हैं निवेश, बस ध्यान रखें ये 7 बातें!

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वर्ष 2021 को अगर IPO का साल कहें तो कुछ गलत नहीं होगा. अभी तक मार्केट में करीब 40 से ज्यादा नए IPO लॉन्च हो चुके है, और एक बड़ी लंबी लाइन बाकी है. हालत ये है कि पिछले कुछ हफ्तों में 4 IPO तक एक साथ लॉन्च हुए. अब ऐसे में आपके मन में सवाल होगा कि इनमें निवेश कैसे करें, क्या होता है IPO का गणित, तो बस इसके लिए आपको जाननी है ये 7 बातें.
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IPO असल में क्या है?

सबसे पहले आपको ये जानना होगा कि IPO होता क्या है? देश में कई प्राइवेट कंपनियां काम कर रही हैं. इनमें कई कंपनियां परिवार या कुछ शेयर होल्डर आपस में मिलकर चलाते हैं. जब इन कंपनियों को पूंजी की जरूरत होती है तो ये खुद को शेयर निवेश करने से पहले आसान भाषा में समझें बाजार में लिस्ट कराती हैं और इसका सबसे कारगर तरीका है IPO यानी Initial Public Offer जारी करना.
(Photo : Getty)

PPF: निवेश से पहले जान लें खास बातें, लखपति से करोड़पति बनने का सफर हो जाएगा आसान

PPF: कोरोना के बाद लोगों को यह बात तो समझ गई है कि पर्याप्त इमर्जेंसी फंड रखना जरूरी है. लेकिन इसके साथ यह भी जानना जरूरी है कि जहां निवेश कर रहे हैं उसके फायदे क्या हैं.

PPF: फ्यूचर के लिए सुरक्षित निवेश के तौर पर पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (Public Provident Fund) निवेशकों की सबसे पसंदीदा स्कीम में से एक है. यहां सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न के लिहाज से भी यह स्कीम काफी फेमस है. कोरोना के बाद लोगों को यह बात तो समझ गई है कि पर्याप्त इमर्जेंसी फंड रखना जरूरी है. लेकिन इसके साथ यह भी जानना जरूरी है कि जहां निवेश कर रहे हैं उसके फायदे क्या हैं. जैसे अगर PPF में निवेश कर रहे हैं तो इससे जुड़ी अहम बातें जान लेनी चाहिए.

PPF लॉक-इन पीरियड

PPF एक लॉन्ग टर्म इनवेस्टमेंट होता है. इसमें 15 साल की लॉक-इन पीरियड (PPF lock in period) होती है. आसान भाषा में समझें तो PPF खाते में जमा की गई राशि को मैच्योरिटी पर ही निकाला जा सकता है, जो कि 15 वर्ष है. ये अवधि पूरी होने पर इसे 5 साल के लिए और बढ़ाया भी जा सकता है. हालांकि, समय से पहले विड्रॉल (PPF withdrawal) की अनुमति है लेकिन केवल इमरजेंसी में आप ऐसा कर सकते हैं.

PPF बैलेंस पर ब्याज का कैलकुलेशन हर महीने किया जाता है. इस पर मिलने वाला ब्याज रकम (PPF Interest rates) हर वित्त वर्ष के अंत में PPF अकाउंट में जमा की जाती है. ब्याज दरों को लेकर सरकार हर तिमाही घोषणा करती है. हर महीने ब्याज रकम की कैल्कुलेशन हर महीने की 5 तारीख के बाद और महीने के आखिरी दिन तक के सबसे कम PPF बैलेंस पर की जाती है. इसीलिए PPF निवेशकों को निवेश करने से पहले आसान भाषा में समझें हर महीने की 5 तारीख से पहले अपने PPF खाते में कॉन्ट्रीब्यूशन करने की सलाह दी जाती है.

निवेश की रकम

निवेशक को PPF Account में कम से कम 500 रुपए सालाना का निवेश करने की आवश्यकता होती है. जबकि PPF खाते में एक फाइनेंशियल वर्ष में ज्यादा से ज्यादा 1.5 लाख रुपए तक का निवेश किया जा सकता है

पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF Taxation) में टैक्स को लेकर कई तरह के फायदे मिलते हैं.क्योंकि यह छूट-छूट-छूट (EEE) कैटेगरी के अंतर्गत आता है. इसका मतलब यह हुआ कि मूल राशि, मैच्योरिटी राशि और साथ ही अर्जित ब्याज पर टैक्स नहीं लगेगा.

निवेश के मंत्र 76: करना चाहते हैं शेयर बाजार में निवेश? तो फायदे में रहने के लिए जानिए इन फंडामेंटल्स के बारे में

निवेश

कम उम्र में ट्रेडिंग शुरू करना एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह वित्तीय अनुशासन लाता है और पर्याप्त बचत के साथ भविष्य की अनिश्चितताओं का सामना करने के लिए तैयार करता है। ज्ञान की कमी के कारण लंबे समय तक लोगों में शेयर बाजार में निवेश करने को लेकर हिचकिचाहट थी। उन्हें पारंपरिक दृष्टिकोण का ही पता था जिसमें उन्हें शेयर खरीदने या बेचने के लिए स्टॉक ब्रोकर के पीछे जाना पड़ता था। इस प्रयास में भारी-भरकम ब्रोकरेज फीस और अन्य छिपी लागत भी हावी थी। अगर आप भी शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं और आपको इसकी ज्यादा जानकारी नहीं है, तो ये खबर आपके लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हम आपको कुछ ऐसे अनुपातों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनकी मदद से आप आसानी से शेयर का मूल्यांकन कर सकेंगे।

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