आज का इतिहास: 230 साल पहले 24 लोगों ने की थी न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत, आज है दुनिया का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज

दुनिया के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज ‘दि न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज’ यानी NYSE की शुरुआत आज ही के दिन की गई थी। इसकी शुरुआत महज 24 लोगों ने की थी। आज इस स्टॉक एक्सचेंज में 2 हजार से भी ज्यादा कंपनियां रजिस्टर्ड हैं। मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से ये दुनिया का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। आज NYSE में हर दिन 90 लाख से भी ज्यादा स्टॉक और सिक्योरिटी की ट्रेडिंग होती है। NYSE को ‘द बिग बोर्ड’ के नाम से भी जाना जाता है।

इसकी शुरुआत करने वाले सभी लोग न्यूयॉर्क में बॉन्ड और सिक्योरिटी की ट्रेडिंग का बिजनेस करते थे। मार्च 1792 में इन लोगों ने न्यूयॉर्क के एक होटल में मीटिंग की। इसका उद्देश्य बिजनेस को और सुरक्षित और बेहतर बनाना था।

आज ही के दिन 1792 में ही इन्हीं 24 व्यापारियों ने एक एग्रीमेंट साइन किया, जिसे बटनवुड एग्रीमेंट नाम दिया गया। इस एग्रीमेंट में बिजनेस से जुड़े नियम-कायदे थे। दरअसल एक गार्डन में बटनवुड के पेड़ के नीचे ये एग्रीमेंट साइन हुआ था इसी वजह से इसे बटनवुड एग्रीमेंट नाम दिया गया। इसी के साथ न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत हुई।

NYSE ने 2 बैंक बॉन्ड और 3 सरकारी बॉन्ड के साथ बिजनेस शुरू किया। 1967 में म्यूरल सीबर्ट नामक पहली महिला ने NYSE में ट्रेडिंग की। 2007 में NYSE और यूरोप के स्टॉक एक्सचेंज ‘यूरोनेक्स्ट’ का मर्जर हुआ। अगले ही साल NYSE ने अमेरिका स्टॉक एक्सचेंज का अधिग्रहण कर लिया

1978: चार्ली चैपलिन का चुराया हुआ ताबूत खोज लिया गया

आज ही के दिन 1978 में चार्ली चैप्लीन का चोरी हुआ ताबूत 11 हफ्ते बाद खोज लिया गया था।

मशहूर अभिनेता चार्ली चैपलिन का निधन 25 दिसंबर 1977 को हुआ था। उनके शव को जेनेवा में एक झील के पास दफनाया गया था, लेकिन दफनाने के तीन महीने बाद कब्र से उनकी डेड बॉडी चोरी हो गई। बॉडी को चुराने के बाद चोरों ने चार्ली की पत्नी से डेड बॉडी को वापस करने के बदले में 4 लाख पाउंड की रकम की मांग की।

इसके पांच हफ्ते बाद पुलिस ने बुल्गारिया के दो लोगों को चार्ली की डेड बॉडी चुराने के आरोप में गिरफ्तार किया। उनका नाम रोमना वारदास और गेंचो गानेव था। आखिरकार 17 मई 1978 को दोनों ने पुलिस को उनकी डेड बॉडी सौंप भारत के प्रतिष्ठित स्टॉक एक्सचेंज दी।

पूछताछ के दौरान दोनों चोरों ने बताया कि वे आर्थिक तंगी से गुजर रहे थे, इसलिए उन्होंने चार्ली की डेड बॉडी ही चुरा ली। इसके बदले में मिलने वाले पैसों से दोनों नया बिजनेस शुरू करना चाहते थे। बाद में चार्ली की डेड बॉडी को स्विट्जरलैंड के पास विलेज ऑफ नोविले में दफनाया गया। इस बार चार्ली के शव को कंक्रीट के एक मजबूत स्लैब के नीचे दफनाया गया, ताकि उनकी डेड बॉडी दोबारा चोरी न हो सके।

1939: पहले स्पोर्ट्स इवेंट का लाइव टेलीकास्ट

1939 में आज ही के दिन अमेरिका के NBC ने टीवी पर पहली बार किसी मैच का लाइव टेलीकास्ट किया।

आज दुनिया के हर छोटे-बड़े स्पोर्ट्स इवेंट का लाइव टेलीकास्ट किया जाता है। इसकी शुरुआत 1939 में आज ही के दिन हुई थी। कैलिफोर्निया के बेकर फील्ड में कोलंबिया और प्रिंसटन के बीच बेसबॉल मैच था।

नेशनल ब्रॉडकास्टिंग कंपनी (NBC) ने करीब 400 से ज्यादा टेलीविजन पर इस मैच का लाइव टेलीकास्ट किया। पूरे टेलीकास्ट के लिए केवल एक ही कैमरे का इस्तेमाल किया गया। ये एक प्रयोग के तौर पर किया गया था। इसी के साथ ये पहला स्पोर्ट्स इवेंट बन गया जिसे लोगों ने घर बैठे टीवी पर लाइव देखा।

इसके सफल होने के 5 महीनों बाद ब्रुकलिन से इसी तरह के दूसरे मैच का टेलीकास्ट किया गया। इस प्रयोग ने खूब वाहवाही बटोरी और अगले दिन के अखबारों में इसे खूब जगह मिली। इसके बाद तो लगभग हर बड़े स्पोर्ट्स इवेंट का लाइव टेलीकास्ट होने लगा। जैसे-जैसे टीवी का इस्तेमाल बढ़ने लगा, लाइव टेलीकास्ट भी बढ़ता गया।

आज वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे

आज के दिन को दुनियाभर में वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे, यानी विश्व उच्च रक्तचाप दिवस यानी हाई ब्लड प्रेशर डे के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य उच्च रक्तचाप के बारे में जागरूकता फैलाना और लोगों को इसे नियंत्रित करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

हाई ब्लड प्रेशर दुनियाभर में होने वाली मौतों की एक बड़ी वजह है। शरीर का नॉर्मल ब्लड प्रेशर 80/120 होना चाहिए। जब यह 135/185 तक पहुंच जाता है तो इसे हाइपरटेंशन कहते हैं। अधिकतर लोगों को पता ही नहीं होता कि वे इस बीमारी से पीड़ित हैं और वे इस पर कोई ध्यान ही नहीं देते। इस वजह से धीरे-धीरे दिल भारत के प्रतिष्ठित स्टॉक एक्सचेंज भारत के प्रतिष्ठित स्टॉक एक्सचेंज और ब्लड वेसल्स कमजोर होती जाती हैं। इसलिए इस बीमारी को साइलेंट किलर भी कहा जाता है।

17 मई को इतिहास में और किन-किन वजहों से याद किया जाता है

2010: भारतीय बॉक्सरों ने कॉमनवेल्थ बॉक्सिंग चैंपियनशिप के सभी 6 स्वर्ण पदक जीत लिए। भारत ने सर्वाधिक 36 अंक लेकर टीम चैंपियनशिप भी जीती।

2004: अमेरिका का मेसाचुसेट्स समलैंगिक शादी को मान्यता देने वाला पहला राज्य बना।

1975: जापानी पर्वतारोही जुनको तैबेई माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली महिला बनीं।

1918: भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति और टाटा समूह के शीर्ष सदस्य रूसी मोदी का जन्म हुआ।

1865: विश्व संचार दिवस मनाने की शुरुआत हुई।

1749: ‘चेचक’ के टीके के आविष्कारक एडवर्ड जेनर का जन्म हुआ।

History of Stock Exchange: कभी बरगद के पेड़ के नीचे हुई थी भारतीय शेयर बाज़ार की शुरुआत

History of Stock Exchange: कभी बरगद के पेड़ के नीचे हुई थी भारतीय शेयर बाज़ार की शुरुआत

आमतौर पर निवेशकों के लिए शेयर बाज़ार आम बोलचाल में इस्तेमाल होने वाला एक शब्द बन चुका है. लेकिन Stock Exchange को लेकर अब भी कई लोगों के मन में कई सवाल हैं, जैसे कि इसके काम करने का तरीका क्या है? इसकी शुरुआत कैसे हुई? आदि. आज हम यहां, बाज़ार से जुड़े इस शब्द, Stock Exchange का पूरा विशलेषण करेंगे. जिससे निवेशकों को उनके हर सवाल का सटीक उत्तर मिल पाए.

ऐसे शुरू हुआ भारत में Stock Exchange

भारत को आज़ादी मिलने से 107 वर्ष पहले ही देश में शेयर बाज़ार की नींव पड़ चुकी थी. मुंबई स्थित टाउनहॉल के पास एक बरगद के पेड़ के नीचे शेयरों का सौदा किया जाता था. इस स्थान पर लगभग 22-25 लोग इकट्ठा होकर शेयरों की खरीद और बिक्री में जुटते थे. साल दर साल निवेशकों की संख्या में आई वृद्धि के बाद, वर्ष 1875 में Stock Exchange के ऑफिस का निर्माण हुआ, जो आज दलाल स्ट्रीट के नाम से मशहूर है. वहीं सरकार द्वारा 1980 में Security and Exchange Board of India (SEBI) की स्थापना से इस सिस्टम में पारदर्शिता लाई गई.

कैसे लिस्ट होती है शेयर बाज़ार में कंपनियां?

Stock Exchange को आसान शब्दों में समझें, तो यह वो जगह है जहां स्टाॅक्स, बाॅन्ड्स, कमोडिटी की खरीद और बिक्री की जाती है. Stock Exchange एक ज़रिया है, जो निवेशकों और कंपनी के बीच काम करता है. जैसे किसी कंपनी को अगर फंड जुटाना हो, तो वह Stock Exchange में खुद को सूचीबद्ध करवाती है. इस प्रक्रिया पर आखिरी फैसला SEBI लेती है, जिसके बाद निवेशकों के कंपनी में निवेश के द्वार खुल जाते हैं. आपको बता दें, कि शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध होने की इस प्रक्रिया को Initial Public Offering (IPO) कहते हैं.

भारत में कितने हैं Stock Exchange?

वैसे तो ज़्यादातर लोग सिर्फ National Stock Exchange (NSE) और Bombay Stock Exchange (BSE) ही जानते होंगे. मगर भारत में इन दोनों के अलावा भी 21 अन्य Stock Exchange भी थे, जो राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सीमा पर काम करते थे. वहीं 8 Stock Exchange और भी हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर काम कर रहे हैं. इनमें से 20 क्षेत्रीय एक्सचेंज, अब SEBI के नए नियमों के आने के बाद बंद हो गए. बंद हुए एक्सचेंज की सूची में Ahmedabad Stock Exchange, Chennai Stock Exchange, Pune Stock Exchange, U.P Stock Exchange आदि का नाम शामिल हैं.

क्यों खास है BSE और NSE?

भारत में BSE और NSE दो काफी महत्वपूर्ण शेयर बाज़ार हैं. इनमें लिस्टेड कंपनियों के शेयर, निवेशक या ब्रोकर सीधे तौर पर खरीदते और बेचते हैं. बात BSE की करें, तो यह वर्ष 1875 से मुंबई स्थित दलाल स्ट्रीट में है और विश्व के 10वें सबसे बड़े Stock Exchange का सूचकांक है, Sensex. इसकी स्थापना करने वाले Premchand Raichand को 'बिग बुल' के नाम से जाना जाता है. वहीं दूसरी ओर NSE की बात करें, तो यह भारत का पहला पूर्णतः कंप्यूटराइज्ड Stock Exchange है. वर्ष 1992 में स्थापित NSE की खासियत ये है कि, इसके सूचकांक को देखकर भारतीय अर्थव्यवस्था की एक झलक देखी जा सकती है. आपको बता दें, कि NSE का सूचकांक Nifty 50 है.

कैसे करें स्टाॅक्स में निवेश?

आम भाषा में समझें, तो शेयर मतलब हिस्सा और बाज़ार वो जगह जहां ग्राहक खरीददारी करता है. अब शेयर बाज़ार में निवेश को ऐसे समझें, कि कोई निवेशक NSE में सूचीबद्ध कंपनी के शेयर खरीदता है, जो कंपनी ने जारी किए हैं, तो उस निवेशक का कंपनी के खरीदे हुए शेयर के आधार पर उतना मालिकाना हक हुआ. शेयर की खरीद और बिक्री निवेशक की बुद्धि पर निर्भर करती है. हालांकि कई बार निवेशक ब्रोकर की भी मदद लेते हैं. शेयर बाज़ार में मौज़ूद स्टाॅक्स में निवेश के लिए, निवेशकों को सबसे पहले एक डीमैट खाता खुलवाना होता है. जो आपके बैंक खाते से लिंक होकर, चाहे ब्रोकर के माध्यम से या खुद स्टाॅक्स की खरीद और बिक्री के माध्यम से मदद करेगा. वहीं वित्तीय समझ की बात करें, तो आज भी Stock Exchange से प्रभावित निवेशकों की सुबह, बाज़ार के उतार-चढा़व देखकर ही होती है.

क्यों आता है शेयर बाज़ार में उतार-चढ़ाव?

ऐसा देखा गया है, कि कई बार शेयर बाज़ार में मौज़ूद कंपनियों के स्टाॅक्स या शेयर में ज़बरदस्त उछाल या गिरावट दिखती है. तो आपको बता दें, कि इस अचानक से आए हुए बदलाव की वजह कंपनी, अर्थव्यवस्था या वैश्विक स्तर की हलचल होती है. जैसे किसी कंपनी को अचानक मिला या छिना कोई आर्डर, कंपनी का मूल्यांकन, बाज़ार से जुड़ी शर्तों की अवहेलना, आदि. वहीं शेयर बाज़ार के पास, कंपनियों के दुर्व्यवहार करने पर गैर सूचीबद्ध करने का भी अधिकार होता है.

आज़ादी के बाद से कितना बदला Stock Exchange

आज़ादी से लेकर वर्तमान तक की बात करें, तो Stock Exchange और इसका काम करने का तरीका अब पहले से काफी स्पष्ट है. हालांकि नए-नए तरीकों से शेयर बाज़ार की ओर ध्यान आकर्षित करने में आज बाज़ार काफी आगे है. फिर चाहे मोबाइल फोन के माध्यम से निवेश हो या वेबसाइट पर जाकर कंपनियों का विशलेषण. आज के समय में Zerodha , Upstox, Groww आदि कुछ ऐसे ऐप्स उपलब्ध हैं, जो ऑनलाइन ट्रेडिंग को रफ़्तार देने में कामयाब हैं. वहीं इस तरह की पहल से आजकल के युवाओं में भी शेयर्स को लेकर उत्साह देखा जा सकता है. तो ऐसा कह सकते हैं, कि बरगद की छांव में शुरू हुआ Stock Exchange आज निवेशकों को वित्तीय छांव दे रहा है.

निम्नलिखित में से भारत में विशालतम शेयर बाजार (स्टॉक एक्सचेंज) कौन सा है?

Bihar Police Subordinate Service Commission (BPSSC) has activated the link to download the mark sheet of Bihar Police Sub Inspector on 21st August 2022. The candidates, who appeared for Bihar Police SI exam, must check their results before 4th September 2022.The new notification for 2022-23 cycle is expected to be released soon.

India VIX ने समझाया: India VIX क्या है और यह कैसे काम करता है?

शेयर बाजार को अस्थिर माना जाता है, जिसमें उच्च स्तर की अस्थिरता होती है, जिसका अर्थ है कि छोटी अवधि में शेयरों की कीमतों में भारी ऊपर और नीचे की गति हो सकती है। बाजार के निवेशकों को डर सूचकांक या अस्थिरता सूचकांक जैसे शब्दों का सामना करना पड़ सकता है। भारत VIX या भारत अस्थिरता सूचकांक के बारे में जानना महत्वपूर्ण है, जो भारत में निवेशकों और व्यापारियों को अस्थिरता-प्रेरित उतार-चढ़ाव को समझने में मदद करता है। इस लेख में, हम VIX इंडिया और इसके महत्व के बारे में चर्चा करेंगे जो आपको सूचित निवेश निर्णय लेने में मदद कर सकता है।

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जानिए, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का ऐतिहासिक सफर, इन्होंने की थी शुरुआत

Know the historical journey of the Bombay Stock Exchange

भारतीय शेयर बाजार का सबसे बड़ा, प्रतिष्ठित और एशिया महाद्वीप का सबसे पहला स्टॉक मार्केट बंबई स्टॉक एक्सचेंज, ऐसी कई उपलब्ध्यिों से परिपूर्ण है। बंबई स्टॉक एक्सचेंज का मानद सूचकांक (इंडेक्स) सेंसेक्स पूरी दुनिया के शेयर (पूंजी ) बाजारों में विशेष और श्रेष्ठ महत्व रखता है। सवा सौ साल से अधिक पुराना इतिहास रखने वाला यह स्टॉक एक्सचेंज विश्वविख्यात है। भारतीय शेयर बाजार के दो बड़े और प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज हैं, बंबई स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज दोनों स्टॉक मार्केट की भारतीय पूंजी बाजार यानि इंवेस्टमेंट मार्केट में अहम भूमिका है। देश के दोनों स्टॉक एक्सचेंज को भारतीय अर्थव्यवस्था और पूंजी बाजार की नींव कहें तो गलत नहीं होगा।

भारतीय शेयर बाजार की बात करें तो पिछले तीन सत्रों से शेयर बाजार अपने उच्चतम स्तर पर है। बंबई स्टॉक एक्सचेंज के सूचकांक सेंसेक्स की बात करें तो पिछले तीन दिनों में सेंसेक्स ने उच्चतम स्तर पर पहुंचकर अपने आल टाइम हाईलेवल को पार कर लिया। जिसकी गूंज पूरी दुनिया के शेयर बाजारों में सुनाई दी। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत के समय मुंबई को बॉम्बे, बंबई नाम से जाना जाता था) भारत ही नहीं बल्कि एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना 1 9वीं सदी के भारतीय व्यापारी प्रेमचंद रॉयचंद ने की थी। प्रेमचंद को कॉटन किंग और बुलियन किंग जैसे नामों से जाना जाता था। प्रेमचंद रॉयचंद सूरत के व्यापारी रॉयचंद दीपचंद के बेटे थे। रॉयचंद परिवार सहित मुंबई में बस भारत के प्रतिष्ठित स्टॉक एक्सचेंज गए थे। फर्राटेदार अंग्रेजी लिखने और बोलने में माहिर प्रेमचंद ने 1849 से स्टॉक ब्रोकर के काम की शुरुआत की। कपास और बुलियान कारोबार में काफी रुचि होने के भारत के प्रतिष्ठित स्टॉक एक्सचेंज कारण उन्होंने इस क्षेत्र में व्यापार कर भारतीय बाजार में काफी दबदबा बनाया। उन्होंने शेयर और स्टॉक ब्रोकर्स एसोसिएशन की स्थापना की, जिसे बाद में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के रुप में पहचान मिली। इस तरह प्रेमचंद रॉयचंद बंबई स्टॉक एक्सचेंज के संस्थापक की भूमिका निभाई।

भारत का यह स्टॉक एक्सचेंज सूचीबद्ध कंपनियों की संख्या तथा बाजार पूंजीकरण के संदर्भ में विशाल है। बीएसई ने भारतीय पूंजी बाजार में प्रणेता की भूमिका निभाई है। अंतर्राष्ट्रीय पूंजी बाजार के अस्तित्व और नियम आने से पूर्व ही बीएसई ने भारतीय पूंजी बाजार के लिए अपना व्यापक नियम और नियमन बना लिया था। आजादी के बाद ही इस एक्सचेंज ने भारतीय पूंजी बाजार के लिए बहतरीन व्यापारिक परंपराएं स्थापित की थी। जिसे दुनिया के पूंजी बाजारों ने सराहा और बीएसई के काम का लोहा माना।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज सिक्युरिटीज कांट्रेक्ट रेग्युलेशन एक्ट 1956 के तहत स्थाई मान्यता मिली है। मैनेजिंग डायरेक्टर के नेतृत्व में डायरेक्टर्स बोर्ड द्वारा एक्सचेंज का संचालन होता है। इस बोर्ड में प्रतिष्ठित प्रोफेशनल्स, ट्रेडिंग सदस्यों के प्रतिनिधियों और सार्वजनिक प्रतिनिधियों का समूह इसके परिचालन में अहम भूमिका निभाता है। भारत में शायद ही ऐसी कोई कंपनी होगी जिसने पूंजी सर्जन के लिए बीएसई की सेवा नहीं ली हो। बीएसई भारत में कैपिटल मार्केट का प्रतीक माना जाता है। बीएसई सेंसेक्स देश के अर्थतंत्र और वित्त बाजार की गतिविधियों को प्रतिबिम्बित करता बेंचमार्क इक्विटी इंडेक्स है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समकक्ष रहकर बीएसई अनेक क्षेत्रों में प्रणेता रहा है।

वर्ष 2002 में स्टॉक एक्सचेंज, मुंबई का नाम बदल कर बीएसई कर दिया गया। बीएसई ने भारत में सिक्युरिटीज (प्रतिभूति) ट्रेडिंग प्रस्तुत की, ट्रेडिंग रिंग (शेयर लिस्टिंग के दौरान घंटा बजाने की परंपरा) की परम्परागत शेयर क्रय विक्रय पद्धति के स्थान पर बीएसई आनलाईन ट्रेडिंग (बोल्ट) के माध्यम से 1995 में ओटोमेटेड ट्रेडिंग सिस्टम शुरुआत हुई। 1997 तक यह नेटवर्क पूरे देश में अपनी शक्ल ले चुका था। 18 फरवरी 2002 से नए इतिहास की शुरूआत हुई, जब टेलीवेंचर्स लि. के शेयर लिस्टिंग की शुरुआत बीएसई के इंटरनेशनल कन्वेंशन हॉल में रिंगिंग समारोह के साथ हुई। यह परंपरा आज भी आधुनिक युग के बीएसई में यथावत जारी है।

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