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स्विंग ट्रेडिंग क्या है, swing trading kya hai

शेयर बाजार में क्लोज पोजीशन

Pune, Maharashtra, India: शेयर निवेशकों को कम ब्रोकरेज और कम मार्जिन फंडिंग ब्याज दरों का अतुल्य लाभ प्रदान करने के लिए बजाज फाइनेंशियल सिक्योरिटीज लिमिटेड (बीएफएसएल) ने बजाज प्रिविलेज क्लब (बीपीसी) को लॉन्च किया है। शेयर बाजार में कई निवेशक उच्च मूल्य और अधिक मात्रा में व्यापार करते है| इन शेयर निवेशकों को एक बढ़िया लाभ देते हुवे बीएफएसएल ने ये प्लान लांच किया है।

डिस्काउंट स्टॉकब्रोकिंग मॉडल के आने से शेयर मार्केट में निवेशकों की वृद्धि हो रही है। डिस्काउंट स्टॉकब्रोकिंग स्पेस में अपनी स्थिति को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से बीएफएसएल ने हाल ही में अपना नया प्लान बजाज प्रिविलेज क्लब (बीपीसी) को लॉन्च किया। यह वार्षिक सदस्यता योजना है जो केवल रु. 9999 रुपये में प्रदान किया जाता है और इससे ग्राहकों को विशेष लाभ प्राप्त होते हैं। इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण बातें ये है (1) ब्रोकरेज दर मात्र रु. 5/आर्डर जो सभी सेगमेंट में लागु है (2) इसके अलावा मार्जिन ट्रेड फाइनेंसिंग (एमटीएफ) केवल 8.5% सालाना की दर पे दिया जाता है। इन विशेष प्रावधानों के चलते बीपीसी के ग्राहक ब्रोकरेज और मार्जिन फंडिंग के ब्याज शुल्क पर काफी बचत कर सकते हैं।

Stock Market Closing: मुनाफावसूली के चलते गिरावट के साथ बंद हुए भारतीय शेयर बाजार, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में बड़ी गिरावट

By: ABP Live | Updated at : 17 Nov 2022 04:06 PM (IST)

Stock Market Closing On 17th November 2022: भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ है. ऑटो, आईटी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर के शेयरों में मुनाफावसूली के चलते शेयर बाजार में गिरावट रही. इससे पहले बाजार में पूरे दिन उतार चढ़ाव देखा गया लेकिन आज का कारोबार खत्म होने पर मुंबई स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स 230 अंकों की गिरावट के साथ 61,750 तो नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का इंडेक्स निफ्टी 65 अंक नीचे 18,243 पर बंद हुआ है.

सेक्टर्स पर नजर डालें तो बैंकिंग, आईटी, ऑटो, फार्मा, एफएमसीजी, मेटल्स, एनर्जी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर के शेयरों में गिरावट रही. केवल सरकारी बैंकों, रियल एस्टेट और इंफ्रा सेक्टर के शेयर हरे निशान में बंद हुए. मिडकैप और स्मॉल कैप इंडेक्स भी गिरकर क्लोज हुआ है. सेंसेक्स के 30 स्टॉक्स में 8 शेयर तेजी के साथ बंद हुए वहीं 22 शेयरों में गिरावट रही. जबकि निफ्टी के 50 शेयरों में 17 शेयर तेजी के साथ तो 33 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए. बाजार में 3616 शेयरों में ट्रेडिंग देखी गई जिसमें 1520 शेयर तेजी के साथ तो 1989 शेयर गिरकर बंद हुए. 123 शेयर के भाव 52 हफ्ते के हाई पर ट्रेड कर रहा था तो 59 शेयर 52 हफ्ते के निचले लेवल पर ट्रेड कर रहा था. बाजार का मार्केट कैप घटकर 283.16 लाख करोड़ रुपये रहा है.

स्विंग ट्रेडिंग के लिए अच्छे स्टॉक का चयन कैसे करें?

एक स्विंग ट्रेडर के तौर पर आपको ये बिल्कुल साफ़ होना चाहिए कि आपको कितने प्रतिशत प्रॉफिट के बाद निकल जाना है, 4 से 15% का प्रॉफिट स्विंग ट्रेडिंग के लिए पर्याप्त है लेकिन ट्रेड लेने से पहले आपको ध्यान रखना है कि आपको केवल ऐसे स्टॉक का चयन करना है जिसका फंडामेंटल स्ट्रांग हो।

आपको स्विंग ट्रेड लेने से पहले रिस्क और रिवॉर्ड रेश्यो को भी ध्यान में रखना होगा। जैसे मान लीजिए आपने कोई ट्रेड लिया जिसमें हर शेयर में आप ज्यादा से ज्यादा 100 रुपए का रिस्क लें सकते हैं और कम से कम प्रति शेयर 300 रुपए के प्रॉफिट के बाद ही आप पोजीशन से एग्जिट लेंगें। 100 रुपए का रिस्क लेकर केवल 75 रुपए का प्रॉफिट लेकर निकल जाना बिल्कुल भी बुद्धिमानी नहीं है। आप चाहे तो टोटल इन्वेस्ट किए गए Amount के परसेंटेज के आधार पर भी रिस्क और रिवॉर्ड तय कर सकते हैं। यानी तब आपका रिस्क-रिवॉर्ड रेश्यो 1:3 का होना चाहिए।

स्विंग ट्रेडिंग के फायदे और नुकसान

स्विंग ट्रेडिंग के फायदे

  • स्विंग ट्रेडिंग में आपको कम समय में प्रॉफिट मिल जाता है।
  • कम प्रॉफिट का टारगेट होने के कारण टारगेट हिट करने की संभावना बहुत बढ़ जाती है।
  • स्टॉक में एंट्री लेने के लिए उसके गिरने का इंतज़ार नहीं करना पड़ता।
  • स्टॉक के फंडामेंटल स्ट्रांग होने के कारण नुकसान होने की संभवना कम होती है।
  • यह एक लेस स्ट्रेस यानी कम तनाव वाली ट्रेडिंग है।
  • अगर आप शेयर बाजार में नए हैं तो भी इसे Try कर सकते हैं।

स्विंग ट्रेडिंग के नुकसान

  • शार्ट टर्म में एग्जिट लेने के कारण आपको बड़ा प्रॉफिट नहीं मिल पता है।
  • स्टॉक से जुडी रोजाना आने वाली हर छोटी बड़ी खबर से शेयर के प्राइस में उतार-चढ़ाव आता है।
  • एक दिन से ज्यादा होल्ड करने के कारण शेयर में गैप अप और गैप डाउन का भी सामना करना पड़ता शेयर बाजार में क्लोज पोजीशन है।
  • डे ट्रेडिंग करने वालों को धैर्य के साथ स्टॉक में बने रहने में प्रॉब्लम आती है।

इंट्राडे ट्रेडिंग और स्विंग ट्रेडिंग में क्या अंतर है?

स्विंग ट्रेडिंग और इंट्राडे ट्रेडिंग के बीच का अंतर (Swing trading vs Day trading) आमतौर पर होल्डिंग टाइम का है। स्विंग ट्रेडिंग में अक्सर कम से कम एक दिन से ज्यादा के शेयर बाजार में क्लोज पोजीशन लिए शेयर को होल्ड किया जाता है, जबकि डे ट्रेडिंग में बाजार बंद होने से पहले पोजीशन को क्लोज करना शेयर बाजार में क्लोज पोजीशन होता हैं।

क्योंकि हमें स्विंग ट्रेडिंग में एक दिन से ज्यादा के लिए पोजीशन को होल्ड करना होता है इसलिए हमें शेयर बाजार में क्लोज पोजीशन गैप अप और गैप डाउन का भी सामना करना पड़ता है।

Gautam Adani नहीं रहे दुनिया के दूसरे सबसे अमीर शख्स, दो दिन में 10 अरब डॉलर गंवाए, जानिए क्यों हुआ ऐसा

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शेयर बाजार की गिरावट में दुनिया के तमाम अरबपतियों को भारी नुकसान हुआ है. दुनिया के दूसरे सबसे अमीर शख्स गौतम अडानी को भी 10 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है. अब वह तीसरे नंबर पर पहुंच चुके हैं.

शेयर बाजार (Share Market) में भारी गिरावट से दुनिया भर में खलबली मची हुई है. इससे छोटे-मोटे निवेशक तो चिंता में हैं ही, गौतम अडानी (Gautam Adani) और मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) शेयर बाजार में क्लोज पोजीशन जैसे दिग्गज अरबपतियों की हालत भी खराब हो गई है. यहां तक कि दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क (Elon Musk) की दौलत पर भी शेयर बाजार (Stock Market) की गिरावट का भारी असर पड़ा है. दुनिया के दूसरे सबसे अमीर शख्स (World's Second Richest Person) बन चुके गौतम अडानी फोर्ब्स की लिस्ट में फिसलकर तीसरे नंबर पर आ गए हैं.

पहले जानिए क्या है शेयर बाजार का हाल

आज यानी 26 सितंबर को सेंसेक्स करीब 953 अंक गिरकर 57,145 अंकों बंद हुआ है. वहीं दूसरी ओर निफ्टी 311 अंक गिरकर 17,016 अंकों के स्तर पर बंद हुआ. पिछले हफ्ते शुक्रवार को सेंसेक्स करीब 1020 अंक गिरा था. उससे पहले भी सेंसेक्स में 337 अंक और 263 अंक की गिरावट देखने को मिली थी. यानी पिछले 4 सत्रों में सेंसेक्स 2,500 अंक से भी अधिक गिर चुका है.

अगर सिर्फ आज यानी 26 सितंबर की बात करें तो शेयर बाजार में गिरावट की वजह से गौतम अडानी को करीब 6.4 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है. इस भारी नुकसान की वजह से उनकी दौलत घटकर 143.1 अरब डॉलर रह गई है. इसकी वजह से वह फोर्ब्स की अमीरों की लिस्ट में खिसक कर तीसरे नंबर पर पहुंच गए हैं. इससे पहले शुक्रवार की गिरावट में गौतम अडानी को करीब 3.5 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था. इस तरह देखा जाए तो सिर्फ दो दिनों में ही गौतम अडानी की दौलत 10 अरब डॉलर यानी करीब 81,590 करोड़ रुपये घट गई है.

अंबानी समेत बाकी अरबपतियों का क्या है हाल?

शेयर बाजार की गिरावट में मुकेश अंबानी को भी भारी नुकसान हुआ है. उनकी दौलत 2.2 अरब डॉलर घटकर 85.6 अरब डॉलर रह गई है. शुक्रवार की गिरावट में भी मुकेश अंबानी को करीब 1.77 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था. शुक्रवार की गिरावट में एलन मस्क को करीब 9 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था, जबकि आज उन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ है. शुक्रवार की गिरावट में जेफ बेजोस को भी करीब 3.7 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था.

अमेरिका के शेयर बाजारों की चाल का भारत के शेयर बाजार पर बहुत अधिक असर पड़ता है. अगर बात Nasdaq 100 की करें तो सिर्फ इसी साल में यह करीब 31 फीसदी तक टूट चुका है. आने वाले दिनों में इसके और 10 फीसदी तक गिरने का अनुमान जताया जा रहा है.

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किन वजहों से लगातार गिर रहा है शेयर बाजार?

शेयर बाजार में गिरावट की कई वजहें हैं. इसमें गिरावट की सबसे बड़ी वजह है ग्लोबल मार्केट, वहां गिरावट की वजह से भारत में भी गिरावट देखी जा रही है.

1- फेडरल रिजर्व ने बढ़ाई दरें: शेयर बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह है अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में 75 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी. महंगाई को काबू में करने के लिए अमेरिका के पास ब्याज दरें बढ़ाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है. एक्सपर्ट्स की मानें तो आने वाली दो पॉलिसी मीटिंग में फेडरल रिजर्व 1.25 फीसदी तक की और बढ़ोतरी कर सकता है. इस चिंता से निवेशक घबराए हुए हैं.

2- रिजर्व बैंक बढ़ा सकता है दरें: जब से फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला सामने आया है, तब से यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि अब भारतीय रिजर्व बैंक भी ब्याज दरें बढ़ा सकता है. उम्मीद की जा रही है इस बार भी शेयर बाजार में क्लोज पोजीशन रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट यानी 0.50 फीसदी की बढ़ोतरी की जा सकती है. दरें बढ़ाए जाने से आम आदमी की ईएमआई महंगी हो जाती है.

शॉर्ट सेलिंग की विशेष बातें

  • शॉर्ट सेलिंग में, ट्रेडर के खाते में शेयर वास्तव में नहीं होता; जिसको वह बेचता है।
  • इसमें ट्रेडर, शेयर प्राइस के घटने का इंतजार करता है. जिससे उसको लाभ होता है।
  • ट्रेडर को हर हाल में शेयर को वापस खरीदना ही चाहिए। वो भी उसी ट्रेडिंग डे पर।
  • यदि कोई ट्रेडर शेयर बाय बैक नहीं कर पाता है तो वह पेनलिटी का हक़दार होगा।
  • यह अधिकतर गिरते बाजार में की जाती है।

शॉर्ट सेलिंग से होने वाले फायदे

  • सबसे बड़ा फायदा जो ट्रेडर को दिखता है वह शेयर बाजार में क्लोज पोजीशन है – शेयर के घटते दम पर भी लाभ हो सकता है।
  • बाजार में लिक्विडिटी अधिक बनी रहती है।
  • ट्रेडर कम पूँजी में मार्जिन लेकर अधिक लाभ ले सकता है।

ज़ेरोधा में शॉर्ट सेलिंग कैसे करें, आइये सीखते है

Short selling in Zerodha स्टेप्स-

    में लॉग इन करें –

2. अब अपनी यूजर आई डी डालें।

4. अपनी Holdings चेक करें, जीरो होनी चाहिए।

5. शेयर तो सेलेक्ट करें

6. अब शेयर को बेच दें

7. अब पोजीशन को क्लोज करना होगा। exit पर क्लिक करें

8. अब आपकी पोजीशन स्क्वायर ऑफ हो चुकी है। ट्रेड भी पूरा हो गया है। अब इस तरह की स्क्रीन दिखाई पड़ेगी

शॉर्ट सेलिंग पर लग सकता है जुर्माना यदि –

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के नियम के अनुसार

अगर कोई ट्रेडर T+2 ट्रेड साइकिल के हिसाब शेयर डिलीवर नहीं कर पाता।

तो वह पिछले ट्रेडिंग दिवस के क्लोजिंग प्राइस से अधिकतम 20% अधिक तक के चार्ज के बराबर देनदार होगा। इस पेनलिटी के साथ 0.05% प्रति दिन, स्टॉक की वैल्यू के हिसाब से देनदार शेयर बाजार में क्लोज पोजीशन होगा।

चलिए, इसको उदाहरण से समझते हैं-

मान लीजिये, एक परिस्थिति में

श्याम ने रिलायंस के 100 शेयर, 800 रुपये प्रति शेयर के भाव से बेचे ( 13 सितंबर 2021, दिन सोमवार). जबकि ये 100 शेयर श्याम के डीमैट खाते में नहीं हैं।

ये 100 शेयर राम के डीमैट अकाउंट में 15 सितंबर 2021, दिन बुधवार को आने चाहिए ( T+2 ट्रेड साईकल के नियमानुसार )

चूँकि, ये शेयर श्याम के डीमैट अकाउंट में मौजूद नहीं थे. इसलिए वह इनको डिलीवर नहीं कर पायेगा। अब राम को स्टॉक देने के लिए, स्टॉक मार्केट में बैकग्राउंड में एक ऑक्शन होगा। जिसमे कोई तीसरा व्यक्ति ( विकास) इन शेयर की डिलीवरी दे सकता है।

निष्कर्ष

T+2 सेटलमेंट नियम के कारण शॉर्ट सेलिंग संभव हो पातीहै। वैसे तो स्टॉक एक्सचेंज इसको लीगली प्रमोट नहीं करते है। लेकिंग कुछ व्यक्ति इसका फायदा उठाते हैं। शॉर्ट सेलिंग एक बहुत ही जोखिम भरा काम है। यह कोई निवेश का तरीका नहीं है। बल्कि इसको हेजिंग के रूप में भी प्रयोग किया जाता रहा है।

शॉर्ट शेयर बाजार में क्लोज पोजीशन सेलिंग करें या नहीं? अब आप स्वयं तय कर सकते हैं। यदि आप इतना जोखिम ले सकते है तो आप कर सकते हैं। अन्यथा सेबी इसको लीगली प्रमोट नहीं करती। आप फायदे और नुकसान को ध्यान में रखकर, निर्णय ले सकते हैं।

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