stock market : Share Market क्या है ? सम्पूर्ण जानकारी

stock market का अर्थ हिन्दी मे share market (शेयर बाजार ) होता है जोकी अपने बहुत लोगों के मुहू से सुना होगा की मे शेयर मार्केट मे अपने पेसे investment या trading करता हु जिससे बहुत पैसे हर रोज कमाता हु तो आपको बात दु की आपको इस आर्टिकल मे stock market शेयर मार्केट एवं स्टॉक मार्केट में क्या अंतर है? या share market की सम्पूर्ण जानकारी मेलेगी

हम आज जानेगे share market के बारे मे

  • शेयर मार्केट क्या होता है
  • शेयर कितने प्रकार के होते है
  • शेयर मार्केट कैसे काम करता है
  • आप कैसे कर सकते हैं शेयर बाजार में निवेश की शुरूआत?

Table of Contents

stock market शेयर बाजार क्या होता है ?

Stock Market या Share Market वह जगह होती हैं जहाँ पर Equity, Debentures, Mutual Funds, Derivatives और अन्य प्रकार की Securities (प्रतिभूतियों) को Stock Exchange के माध्यम से ख़रीदा और बेचा जाता हैं|

आसान शब्दों मे बोला जाए stock market शेयर मार्केट जो शेयर का मतलब होता है हिस्सा. बाजार उस जगह को कहते हैं जहां आप खरीद-बिक्री कर सकें आपको यह जानना जरूरी है की

भारत मे दो सबसे बड़े stock exchanger है

    (Bombay Stock Exchange) (National Stock Exchange)

BSE या NSE में ही किसी लिस्टेड कंपनी के शेयर ब्रोकर के माध्यम से खरीदे और बेचे जाते हैं. शेयर बाजार (Stock Market) में हालांकि बांड, म्युचुअल फंड और डेरिवेटिव का भी व्यापार होता है.

स्टॉक बाजार या शेयर बाजार में बड़े रिटर्न की उम्मीद के साथ घरेलू के साथ-साथ विदेशी निवेशक (FII या FPI) भी काफी निवेश करते हैं.

शेयर कितने प्रकार के होते है

  1. Equity Share (इक्विटी शेयर)
  2. Preference Share (परेफरेंस शेयर )
  3. DVR Share (डी वी आर शेयर )

Equity Share (इक्विटी शेयर)

स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड कंपनी जब अपना शेयर इशू करती है तो उन शेयर को equity share कहा जाता है .

बंकि अन्य शेयर कि तुलना में equity share सबसे ज्यादा ट्रेड किये जाते है क्योंकि यह शेयर लगभग सभी कंपनी के द्वारा इशू किये जाते है .

स्टॉक एक्सचेंज में शेयर मार्केट एवं स्टॉक मार्केट में क्या अंतर है? लोग सबसे ज्यादा इक्विटी शेयर्स पर ही इन्वेस्ट और ट्रेडिंग करते है इस कारण से इन्हें लोग इक्विटी शेयर कि जगह सिर्फ शेयर कहना पसंद करते है .

Preference Share (परेफरेंस शेयर )

शेयर बाजार में इक्विटी शेयर के बाद परेफरेंस शेयर का नाम बहुत चलता है , परेफरेंस शेयर और इक्विटी शेयर इन दोनों में ज्यादा अंतर नहीं है .

क्योंकि यह दोनों है तो शेयर ही , लेकिन कुछ बाते है जो इक्विटी शेयर से परेफरेंस शेयर को अलग बनती है .

जैसे कि परेफरेंस शेयर होल्डर कभी भी कंपनी कि मीटिंग में वोटिंग नहीं कर सकता . क्योंकि परेफरेंस शेयर होल्डर के पास इसका अधिकार नहीं होता .

और परेफरेंस शेयर होल्डर को कंपनी से मिलने वाला मुनाफा पहले ही तय कर दिया जाता है जो कि उसे साल के अंत में मिलने वाला है, इस प्रकार से परेफरेंस शेयर इक्विटी से अलग है .

DVR Share (डी वी आर शेयर )

DVR Share Full Form is : Share With Differential Voting Rights.

डी वी आर शेयर इक्विटी और परेफरेंस शेयर से अलग है ये इस लिए अलग है कि डी वी आर शेयर होल्डर को इक्विटी शेयर कि तरह लाभ तो मिलता है लेकिन उसकी तरह वोटिंग राइट्स नहीं मिलते .

ऐसा नहीं है कि डी वी आर शेयर होल्डर वोटिंग नहीं कर सकता , डी वी आर होल्डर वोटिंग कर सकता है लेकिन उसके voting rights सुनिश्चित होते है . यही कि उसको जहाँ वोटिंग करने का अधिकार दिया जाएगा वही डी वी आर शेयर होल्डर वोटिंग कर पायेगा .

शेयर मार्केट कैसे काम करता है

शेयर मार्केट क्या है यह समझने के बाद जानते है की यह कैसे काम करता है|

यह बड़ा ही आसान है आपको इन चार चीजो को समझना होगा –

  • लिस्टेड कम्पनियां
  • शेयर धारक
  • डिमांड और सप्लाई
  • मार्केट की परिस्थिति आदि

इसे सरल तरीके से एक एक करके समझते है >>>

मान लीजिये कि NSE में सूचीबद्ध किसी कंपनी ने कुल 10 लाख शेयर जारी किए हैं. आप उस कंपनी के प्रस्ताव के अनुसार जितने शेयर खरीद लेते हैं आपका उस कंपनी में उतने हिस्से का मालिकाना हक हो गया. आप अपने हिस्से के शेयर किसी अन्य खरीदार को जब भी चाहें बेच सकते हैं.

कंपनी जब शेयर जारी करती है उस वक्त किसी व्यक्ति या समूह को कितने शेयर देना है, यह उसके विवेक पर निर्भर है. शेयर बाजार (Stock Market) से शेयर खरीदने/बेचने के लिए आपको ब्रोकर की मदद लेनी होती है.

ब्रोकर शेयर खरीदने-बेचने में अपने ग्राहकों से कमीशन चार्ज करते हैं.

किसी लिस्टेड कंपनी के शेयरों का मूल्य BSE/NSE में दर्ज होता है. सभी सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों का मूल्य उनकी लाभ कमाने की क्षमता के अनुसार घटता-बढ़ता रहता है. सभी शेयर बाजार (Stock Market) का नियंत्रण भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी या SEBI) के हाथ में होता है.

Sebi की अनुमति के बाद ही कोई कंपनी शेयर बाजार (Stock Market) में लिस्ट होकर अपना प्रारंभिक निर्गम इश्यू (आईपीओ या IPO) जारी कर सकती है.

प्रत्येक तिमाही/छमाही या सालाना आधार पर कंपनियां मुनाफा कमाने पर हिस्साधारकों को लाभांश देती है. कंपनी की गतिविधियों की जानकारी SEBI और BSE/NSE की वेबसाइट पर भी उपलब्ध होती शेयर मार्केट एवं स्टॉक मार्केट में क्या अंतर है? है

कोई कंपनी BSE/NSE में कैसे लिस्ट होती है?

शेयर बाजार (Stock Market) में लिस्ट होने के लिए कंपनी को शेयर बाजार से लिखित समझौता करना पड़ता है. इसके बाद कंपनी पूंजी बाजार नियामक SEBI के पास अपने सभी जरूरी दस्तावेज जमा करती है. SEBI की जांच में सूचना सही होने और सभी शर्त के पूरा करते ही कंपनी BSE/NSE में लिस्ट हो जाती है.

इसके बाद कंपनी अपनी हर गतिविधि की जानकारी शेयर बाजार (Stock Market) को समय-समय पर देती रहती है. इनमें खास तौर पर ऐसी जानकारियां शामिल होती हैं, जिससे निवेशकों के हित प्रभावित होते हों.

शेयरों के भाव में उतार-चढ़ाव क्यों आता है?

किसी कंपनी के कामकाज, ऑर्डर मिलने या छिन जाने, नतीजे बेहतर रहने, मुनाफा बढ़ने/घटने जैसी जानकारियों के आधार पर उस कंपनी का मूल्यांकन होता है. चूंकि लिस्टेड कंपनी रोज कारोबार करती रहती है और उसकी स्थितियों में रोज कुछ न कुछ बदलाव होता है, इस मूल्यांकन के आधार पर मांग घटने-बढ़ने से उसके शेयरों की कीमतों में उतार-चढाव आता रहता है.

अगर कोई कंपनी लिस्टिंग समझौते से जुड़ी शर्त का पालन नहीं करती, तो उसे सेबी BSE/NSE से डीलिस्ट कर देती है.

शायद आपको पता न हो, विश्व के सबसे अमीर व्यक्तियों में शामिल वारेन बफे भी शेयर बाजार (Stock Market) में ही निवेश कर अरबपति बने हैं.

आप कैसे कर सकते हैं शेयर बाजार में निवेश की शुरूआत?

आपको सबसे पहले किसी ब्रोकर की मदद से डीमैट अकाउंट खुलवाना होगा. इसके बाद आपको डीमैट अकाउंट को अपने बैंक अकाउंट से लिंक करना होगा.

बैंक अकाउंट से आप अपने डीमैट अकाउंट में फंड ट्रांसफर कीजिये और ब्रोकर की वेबसाइट से खुद लॉग इन कर या उसे आर्डर देकर किसी कंपनी के शेयर खरीद लीजिये.

इसके बाद वह शेयर आपके डीमैट अकाउंट में ट्रांसफर हो जायेंगे. आप जब चाहें उसे किसी कामकाजी दिन में ब्रोकर के माध्यम से ही बेच सकते हैं.

Trading और Investment क्या हैं, दोनों में क्या अंतर है

जब भी नए लोग शेयर मार्केट में आते है। उसके मन में ये सवाल जरूर आता ही हैं। Trading और Investing क्या है इन दोनों में क्या अंतर होते हैं। ये सवाल मन में आना जायज भी हैं। शेयर मार्केट एवं स्टॉक मार्केट में क्या अंतर है? जब शेयर मार्केट एवं स्टॉक मार्केट में क्या अंतर है? तब नए लोगो को ये समझ नहीं आते उसे कैसे पता लगेगा उसका जोखिम क्षमता और लक्ष्य के हिसाब से, Trading और Investing में उसके लिए किया बेहतर होगा। आज हम जानेंगे Trading और Investing होता क्या है, दोनों में क्या अंतर हैं, Trading कितने तरह की होते हैं। साथ ही साथ जानेंगे कि ट्रेडिंग से हर रोज कमाई कर सकते है या नहीं।

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Trading क्या होता है:-

जब भी आप शेयर को खरीदते हो और उस दिन ही बेच देते हो। तब इसे Trading कहते हैं। मतलब आप Stock Trading में ज्यादा समय तक शेयर को अपने पास नहीं रख सकते हो। मान लीजिए आप एक शेयर खरीदा 200 रुपये में प्रॉफिट होने पर शेयर मार्केट एवं स्टॉक मार्केट में क्या अंतर है? आपने उस दिन ही 220 रुपये में बेच दिया। इसी प्रोसेस को कहते है ट्रेडिंग। Trading करते वक्त Trader हमेशा Technical Analysis के साथ चलते हैं। जिससे उस कंपनी शेयर मार्केट एवं स्टॉक मार्केट में क्या अंतर है? के शेयर प्राइस को कुछ समय आगे का शेयर प्राइस अंदाजा हो जाता हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कंपनी क्या काम करती है, भविष्य की योजना क्या हैं। सिर्फ ये देखा जाएगा शेयर प्राइस किस तरफ जा रही है। Trading करते समय न्यूज़ पर ध्यान देना बहुत जरुरी होता हैं. क्युकी कोई अच्छी खबर किसी भी शेयर को ऊपर ले जा सकती हैं। और बुरी खबर एकदम से नीचे भी ला सकती हैं।

Trading के प्रकार (Types of Trading):-

बहुत सारे Types of Trading होते है मुख्य रूप से 5 तरह का होता है। जिससे ट्रेडर ट्रेडिंग करके पैसा कमाई कर सके।

  1. Day Trading:- इसमें ट्रेडर को जिस दिन खरीदा उस दिन ही शेयर को बेचना पड़ता हैं। उस स्टॉक को कुछ समय के लिए होल्ड कर सकता है। मार्केट बंद होने से पहले ही ट्रेडर को शेयर बेचना ही पड़ता हैं। इसमें छोटे छोटे पल स्टॉक में होने वाले ऊपर नीचे से Traders अपना प्रॉफिट कर सकते हैं।
  2. Scalping Trading:- Day Trading और Scalping दोनों एक ही तरह का होता हैं। इस ट्रेडिंग में खरीद बेच होते है लेकिन दिन में कही बार ये ट्रेंड किया जा सकता हैं। आपको प्रॉफिट भी हो सकता है और नुकसान भी, इस पर निर्भर करता है शेयर मार्केट एवं स्टॉक मार्केट में क्या अंतर है? कि आपने किस प्रकार का ट्रेंड किया हैं।
  3. Swing Trading:- इस ट्रेडिंग में आप खरीद और बेच तो सकते हो। अगर आपको खरीदा हुआ दिन नुकसान हो रहा है तो आप उस दिन शेयर को ना बेचकर कुछ दिनों तक होल्ड भी कर सकते हो। फिर जब प्रॉफिट आ जाता है तब बेचकर मुनाफा कमाई कर सकते हैं।
  4. Momentum Trading:- इस Trading को ट्रेंडर तब प्रयोग करता है जब कोई शेयर ऊपर जाता दिखता हैं। तब खरीदारी कर लेता है जैसे ही कोई उस शेयर का खराब न्यूज़ आता है तब तुरंत बेच देते हैं। जिससे Trader कुछ समय में ही अच्छी मुनाफा कमाई कर लेते हैं। लेकिन इसके लिए न्यूज़ के साथ अपडेट रहना बहुत जरुरी हैं। अगर सही समय पर शेयर को नहीं बेचा तो बहुत ज्यादा नुकसान भी हो सकता हैं।
  5. Position Trading:- इस तरह का ट्रेडिंग में आप कुछ दिनों के लिए ट्रेडिंग कर सकते हैं। ये Trading उन लोगों के लिए है जो लोग नियमित रूप से मार्केट में नहीं आते। खरीद कर कुछ दिनों के बाद मुनाफा आते ही बेच कर निकल जाते। इसी तरह का ट्रेडर को कहते हैं Position Trading।

Investing क्या होता है:-

जब कोई शेयर आज खरीद के बहुत साल बाद बेच देते है तब इसे Investing कहते हैं। इन्वेस्टिंग में आप बहुत लंबे समय के शेयर को अपने Demat Account में रखते हो। कंपनी के वित्तीय विवरण, पिछले प्रदर्शन, भविष्य में होने वाले ग्रोथ को देखते हुए ही किसी भी शेयर में इन्वेस्ट करता हैं। Investing में Fundamental Analysis करना बहुत जरुरी हैं। जिससे आपको कंपनी के बारे अच्छी नॉलेज होगा और भविष्य में अच्छा रितर्न कमाके देगा।

Trading और Investment क्या हैं, दोनों में क्या अंतर है

Investing के प्रकार (Types of Investing):-

मुख्य रूप से इन्वेस्टिंग दो तरह का होता हैं। जिससे आपको लंबे समय में जबरदस्त मुनाफा कमाई करके देगा।

  1. Value Investing:- इस तरह का इन्वेस्टिंग में आप अच्छी कंपनी का शेयर प्राइस जब नीचे आता है। तब आपको उसमे इन्वेस्ट करना चाहिए। Value Investing में इन्वेस्टर शेयर का विश्लेषण करके देखता है कि कौन सा शेयर कम दाम में मिल रहा हैं। फिर उसमे लंबे समय तक निवेश करता हैं।
  2. Growth Investment:- जो कंपनी भविष्य में ग्रोथ की संभावना देखता है उसी शेयर में इन्वेस्टर लंबे समय के लिए निवेश करता है। इसी को Growth Investment कहते हैं। इससे Investor उस कंपनी में ज्यादा इन्वेस्ट करता है जो कंपनी Fundamentally बहुत मजबूत हैं।

Trading और Investing में अंतर क्या है (Difference between Trading and Investing):-

  • Trading कम समय के लिए होता हैं।
  • Investing लंबे समय के लिए होता हैं।
  • इसमें Technical Analysis का इस्तेमाल करते हैं।
  • Investing में Fundamental Analysis का इस्तेमाल करते हैं।
  • Trading में कम समय में बहुत ज्यादा पैसा कमाई कर सकते हैं।
  • इसमें आपका कमाई करने के लिए बहुत ज्यादा समय लगता हैं।
  • ट्रेडिंग करने से ब्रोकर का शुल्क बहुत ज्यादा होता हैं।
  • इन्वेस्टिंग में ब्रोकर का शुल्क ना के बराबर होता हैं।
  • Trading जुआ की तरह होता हैं सोचने समझने के लिए समय नहीं मिलता।
  • Investing में आप सोच समझकर निवेश कर सकते हैं

क्या Trading से रोज पैसा कमाई कर सकते है:-

जी बिल्कुल आप ट्रेडिंग से हर रोज पैसा कमाई कर सकते हो। लेकिन जैसा कि हम जानते है Share Market रिस्क भी होता हैं। जिस तरह आप रेगुलर कमाई कर सकते है ठीक उसी तरह नुकसान भी हो सकता हैं। लाभ और नुकसान निर्भर करता है आपके ट्रेडिंग रणनीति के ऊपर। कब आप कौन शेयर मार्केट एवं स्टॉक मार्केट में क्या अंतर है? सा ट्रेड ले रहे हो और आप कितना सही हो। जहा लोग बहुत कम समय में लाखो रूपया कमा लेते है वही कुछ लोग कम समय में लाखों रुपये का नुकसान भी कर लेते हैं।

अगर आप नए निवेशक हो तो आपको सबसे पहले Investing की तरफ जाना चाहिए। क्युकी अच्छा शेयर कम समय में नीचे भी आ सकता हैं। लेकिन लंबे समय में वो शेयर जरूर ऊपर जाएगा ही। आपको एसी शेयर में निवेश करना चाहिए जो शेयर भबिस्य में बढ़ने की पूरी संभावना रहती हैं।

आशा करता हु आपको Trading और Investment क्या हैं, दोनों में क्या अंतर है, कितने Types के होते है आपको अच्छी तरह से समझमे आ गया होगा । इससे जुड़ी कोई सवाल या सुझाब है तो कमेंट में जरुर बताए। शेयर मार्केट के बारे में बिस्तार से जानने के लिए आप हमारे और भी पोस्ट को पढ़ सकते हैं।

ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग के बीच क्या अंतर है ? Trading Vs Investing

नमस्ते दोस्तों ! स्वागत है आपका आज के इस महत्वपूर्ण लेख में। आज हम शेयर मार्केट के ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग के बीच क्या अंतर है ? एवं शेयर मार्केट एवं स्टॉक मार्केट में क्या अंतर है? पढ़ने वाले है। तो चलिए शुरू करते हैं.

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ट्रेडिंग क्या है ?

ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग के बीच क्या अंतर है ?

शेयर मार्केट में ट्रेडिंग यह एक महत्वपूर्ण संकल्पना है। ट्रेडिंग के बिना शेयर मार्केट की बात ही नहीं हो सकती। शेयर मार्केट में हर दिन लाखों करोड़ों लोग ट्रेडिंग करते हैं आज हम ट्रेडिंग क्या है? इसके बारे में समझने वाले हैं।

शेयर बाजार में शेयर की लेनदेन या शेयर को खरीदना- बेचना मुनाफा कमाने के लिए इसी को ट्रेडिंग कहते हैं। स्टॉक एक्सचेंज पर जो सूचीबद्ध कंपनियों की शेयर्स होते है. उसमें ही खरीद-बेच करना, उसी ट्रेडिंग कहा जाता है। ट्रेडिंग को वित्तीय साधनों या प्रतिभागियों में लेनदेन करना कहा जाता है। ट्रेडिंग में आपको ज्यादा समय और जोखिम लग जाता है। आपको अपना समय ट्रेडिंग सीखने में देना पड़ता है, तभी आप ट्रेडिंग में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। ज्यादातर लोग बिना नॉलेज की ट्रेडिंग करते हैं और अपना पैसा गवाए बैठते हैं और बाद में शेयर मार्केट को जुआ बाजार मानकर बाजार से निकल जाते हैं। अगर आप बिना नॉलेज के स्टॉक मार्केट में उतरेंगे तो घाटा कर बैठेंगे।

इन्वेस्टिंग क्या है ?

ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग के बीच क्या अंतर है ?

इन्वेस्टिंग का मतलब है, अपने पैसे या अन्य संसाधनों को किसी ऐसी चीज की और लगाना जिससे आप आय (Income) अर्जित करने की उम्मीद करते हैं, लाभ कमाएं या कोई अन्य सकारात्मक लाभ बनाएं। जब आप निवेश करते हैं तो आप ऐसी संपत्तियां खरीदते हैं जिनको आप समय के साथ मूल्य में वृद्धि की उम्मीद करते है, जिससे आपकी राशि बढ़ सकती है। Investing आपको लंबे समय के बाद करोड़पति बना सकती है। इसके बहुत सारे उदाहरण है जैसे कि, वारेन बफेट, राकेश झुनझुनवाला, विजय केडिया, पीटर लिंच इन लोगो ने शेअर बाजार मे लंबे समय तक अच्छे कंपनी मे निवेश कर के संयम रखा। बाद में, इन्ही निवेश ने उन्हें करोडो कमाके दिये।

ट्रेडिंग वर इन्व्हेस्टिंग के बीच क्या अंतर है ?

हमने अभी तक ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग के बीच मे जाना है। ट्रेडिंग के बीच का अंतर हमे पता होना चाहिये, आपके लिये बहुत जरुरी होता है। तो चलिए शुरू करते है –

Share Market Today: वैश्विक संकेत अच्छे, हरे निशान के साथ खुल सकता है शेयर बाजार

Stocks To Watch: ICICI बैंक, एक्सिस बैंक, एसबीआई, आईटीसी, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स

Share Market Today: वैश्विक संकेत अच्छे, हरे निशान के साथ खुल सकता है शेयर बाजार

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) एक दिन पहले सोमवार की सुबह कमजोर शुरुआत के बाद फिर बढ़त दर्ज की और अंत में एनएसई निफ्टी (NSE Nifty 50) 0.55 अंक बढ़कर 18,497 पर बंद हुआ जबकि बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 51 अंक गिरकर 62,130 के स्तर पर बंद हुआ. हालांकि, बैंक निफ्टी इंडेक्स ने एक बार फिर दूसरे प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया और 75 अंक बढ़कर 43,708 के उच्च स्तर पर बंद हुआ.

सेक्टरों के आधार पर देखें तो पीएसयू बैंक और रियलिटी इंडेक्स ने सबसे ज्यादा फायदा कमाया जबकि आईटी और फार्मा सेक्टर सबसे अधिक गिरे. मिंट से बातचीत में एक्सपर्ट ने कहा कि निफ्टी का सपोर्ट लेवल 18,350 है.

विदेशी बाजारों का क्या हाल?

प्रमुख अमेरिकी बाजारों ने कैसा किया प्रदर्शन-

S&P 500 1.43 फीसदी चढ़ा

NASDAQ में 1.26 फीसदी बढ़ा

Dow Jones में 1.58 फिसदी की बढ़त दर्ज

एशियाई बाजार कर रहे अच्छा प्रदर्शन-

सिंगापुर स्‍टॉक एक्‍सचेंज सुबह 7 बजकर 25 मिनट पर 28.5 अंक या 0.15% फीसदी ऊपर है

जापान के निक्केई में 0.28 फीसदी बढ़ा

ताइवान का शेयर बाजार 0.11 फीसदी चढ़ा

साउथ कोरिया का कॉस्पी 0.16 फीसदी नीचे है

एनएसई पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 12 दिसंबर को, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 138.81 करोड़ रुपये के शेयर्स बेचे, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी 695.60 करोड़ रुपये के शेयर्स खरीदे हैं.

खबरों में हैं ये स्टॉक्स

आज शेयर बाजार में इन स्टॉक्स पर नजर रख सकते हैं जो खबरों में बने हुए हैं-

ICICI बैंक, एक्सिस बैंक, एसबीआई, आईटीसी, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स

डिस्क्लेमर: यहां दिए गए किसी भी तरह के इन्वेस्टमेंट टिप्स या सलाह एक्सपर्ट्स और एनालिस्टस के खुद के हैं. और इसका क्विंट हिंदी से कोई लेना-देना नहीं है. कृपया कर किसी भी तरह के इन्वेस्टमेंट डिसिजन लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य ले.

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