The redeemed proceeds would be subject to capital gains tax (short-term or long-term) depending on the holding period.

पारस्परिक निधि (म्युचुअल फंड)

म्युचुअल फंड ऐसी इकाई है जो विभिन्न प्रतिभूतियों में निवेश करने के लिए बड़ी संख्या में निवेशकों के पैसे को एकत्रित करती है। इस धन को तब विभिन्न वित्तीय क्या म्यूच्यूअल फंड्स में ऑनलाइन निवेश करना सुरक्षित है साधनों में निवेश करने के लिए इकाई धारकों की ओर से एक पेशेवर निधि प्रबंधक द्वारा प्रबंधित किया जाता है।

टिप्पणी: पारस्परिक निधि‍यों (म्युचुअल फंड) में निवेश करने के लिए, निवेशकों को पारस्परिक निधि (म्यूचुअल फंड) संबंधी केवाईसी (अपने ग्राहक को जानें) का अनुपालक होने की आवश्यकता होती है।

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मौजूदा क्या म्यूच्यूअल फंड्स में ऑनलाइन निवेश करना सुरक्षित है ग्राहक: यदि आप उत्पाद के विवरण पाने के
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Mutual Funds Investment: म्यूचुअल फंड्स में निवेश करना सुरक्षित है या नहीं?

Is MF Investment Safe: शुरुआत करने वालों के सामने पहला बड़ा सवाल होता है कि म्यूचुअल फंड्स में निवेश करना सेफ है या नहीं। चूंकि भारत के लोग बड़े फायदे के बजाय अपने पैसे की सुरक्षा को ज़्यादा महत्व देते हैं, इसलिए वो इस सवाल का जवाब 'हां' या 'नहीं' में चाहते हैं।

mutual-funds

#1. आपको खुद के प्रति ईमानदार रहना होगा
म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने की पहली शर्त यही है कि आपको पता होना चाहिए कि आप ज़्यादा बड़े रिटर्न के लिए निवेश कर रहे हैं या लंबे समय के लिए निवेश कर रहे हैं। बाज़ार में हर तरह की कंपनियां हैं। कोई कम समय में बड़ा फायदा देती हैं, पर उनमें रिस्क ज़्यादा होता है। कोई लंबे समय बाद अच्छा रिटर्न देती हैं और इनमें रिस्क कम होता है। तो आपको निवेश करने से पहले म्यूचुअल फंड्स से जुड़ी ढेर सारी कंपनियों और स्कीम के बारे में पढ़ना चाहिए। इंटरनेट पर तमाम ऐसी वेबसाइट्स हैं, जो म्यूचुअल फंड्स स्कीम के बारे में तमाम तरह की जानकारी देती हैं और अलग-अलग कंपनियों की आपस में तुलना भी करती हैं। तो म्यूचुअल फंड्स के बारे में थोड़ी पढ़ाई करने से आप अपनी ज़रूरत समझ सकेंगे और उसी के मुताबिक निवेश कर सकेंगे।

#2. सेबी के लेबल से पता कीजिए कौन सी कंपनी कैसी है
मान लीजिए आपने निवेश का मकसद तय कर लिया। अब आपके सामने सवाल होगा कि आप किस कंपनी के म्यूचुअल फंड्स में निवेश करें। यहां पर सिक्यॉरिटीज़ ऐंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) आपकी मदद करेगा। SEBI ने ढेर सारे म्यूचुअल फंड्स को तीन लेबल में बांट रखा है- ब्लू, येलो और ब्राउन लेबल। ब्लू लेबल यानी सबसे कम रिस्क, येलो लेबल यानी मीडियम रिस्क और ब्राउन लेबल यानी सबसे ज़्यादा रिस्क। रिस्क के अलावा ये लेबल यह भी बताते हैं कि फलां स्कीम ज़्यादा पैसे कमाने के लिए है या नियमित रूप से रिटर्न पाने के लिए है। शॉर्ट टर्म निवेश के लिए है या लॉन्ग टर्म निवेश के लिए। लेबल से आप यह भी जान सकते हैं कि कोई कंपनी शेयर बाज़ार में निवेश करती है या गोल्ड में निवेश करती है। इसके आपको फैसला लेने में आसानी होगी।

#3. और आखिर में सेफ्टी का सवाल
म्यूचुअल फंड्स समझने के बाद आखिरी सवाल यही बचता है कि इनमें निवेश सुरक्षित या नहीं। इस सवाल के भी दो हिस्से हैं। पहला, क्या कोई कंपनी हमारा पैसा लेकर भाग तो नहीं जाएगी, दूसरा, क्या हमें निवेश के बदले निश्चित रिटर्न मिलेगा।

इन सवालों के जवाब ये हैं कि SEBI और असोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) जैसी संस्थाएं होने की वजह से म्यूचुअल फंड्स का काम कर रही कोई कंपनी आपका पैसा लेकर भाग नहीं जाएगी। SEBI के नियम किसी भी कंपनी को लोगों के म्यूचुअल फंड्स में निवेश किए गए सारे पैसे को कैश में बदलने की इजाज़त नहीं देती। कंपनियों को हर महीने बताना पड़ता है कि उनके पास निवेशकों का कितना पैसा है। तो म्यूचुअल फंड्स का काम कर रही कोई भी कंपनी आपका पैसा लेकर भागेगी नहीं।

दूसरे सवाल का जवाब यह कि निवेश के बदले मिलने वाला रिटर्न बाज़ार में हो रही उथल-पुथल पर निर्भर करता है। कोई भी यह बात दावे से नहीं कह सकता कि फलां कंपनी कभी नहीं डूब सकती। आमतौर पर सभी म्यूचुअल फंड्स निश्चित रिटर्न देते हैं, भले वह कम-ज़्यादा हो, लेकिन काफी कुछ शेयर बाज़ार पर भी निर्भर करता है।

अंतत: हमें यही हासिल मिलता है कि हमें अपना पैसा खोने के डर से ज़्यादा सही कंपनी और सही स्कीम की जानकारी होनी चाहिए। इसके लिए आप इंटरनेट पर जानकारी हासिल कर सकते हैं, एक्सपर्ट्स से बातचीत कर सकते हैं और बाज़ार के हालिया रुझानों का विश्लेषण कर सकते हैं। सेफ और अनसेफ की आपकी क्या परिभाषा है, इसे आप ही तय करेंगे।

₹500 से एक करोड़ तक का सफर | What is Mutual Fund in Hindi | 3 मिनट में

लम्बे समय में, इक्विटी स्कीम में औसतन लगभग 12%, का रिटर्न (लाभ) मिलता है। अगर आप अगले 30 साल तक हर महीने ₹3000 म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश करते हैं तो 12% रिटर्न (लाभ) की दर से आपका पैसा (₹1,00,00,000) 1 करोड़ रुपये हो जाएगा।

किसी म्यूचुअल फंड में निवेश शुरू करने के लिए आपको कितना धन चाहिए?

हालाँकि, आप न्यूनतम 500 रु. से निवेश करना शुरू सकते हैं। आप अगले 30 साल तक हर महीने ₹500 म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं तो 12% रिटर्न की दर से आपका पैसा 17,64,000 करोड़ रुपये हो जाएगा।

म्यूचुअल फंड में निवेश करने का सही समय क्या है?

विभिन्न अध्ययनों से पता चला है कि बाज़ार में निवेश करने के लिए सही समय का इंतेज़ार करने के बजाए बाज़ार में निवेश करना ज़्यादा बेहतर है। बाज़ार सुधार की प्रतीक्षा न करें क्योंकि इस प्रतीक्षा की कोई निश्चित अवधि नहीं है। आपका लक्ष्य क्या है और बिना देरी किए निवेश करें।

म्यूच्यूअल फंड कितने प्रकार के होते हैं ?

मुख्य रूप से म्यूच्यूअल फंड 3 प्रकार के होते हैं। 1- इक्विटी फंड, 2- डेट फंड, 3-हाइब्रिड फंड

म्यूचुअल फंड में ऑनलाइन निवेश कैसे करें

INDmoney एप्लीकेशन द्वारा, आजकल म्यूचुअल फंड में ऑनलाइन निवेश करने के लिए बाजार में बहुत सारे एप्लीकेशन हैं। लेकिन मेरा पर्सनल फेवरेट INDmoney एप्लीकेशन हैं, जो यूजर फ्रेंडली है और इस प्लेटफार्म पर 0% कमीशन फीस है। – मतलब सब कुछ फ्री।

आज आप ने क्या सीखा?

इस ब्लॉग पोस्ट में हमने म्यूच्यूअल फंड क्या है यह कितने प्रकार का होता है और म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश करने का सबसे बढ़िया माध्यम या एप्लीकेशन कौन सा है।
मुख्य रूप से इन चीजों के बारे में सीखा।

हमें उम्मीद है कि आपको हमारी यह पोस्ट पसंद आई होगी।

अगर म्यूच्यूअल फण्ड की जानकारी से सम्बंधित कोई समस्या है या जानकारी चाहिए तो कमेंट बॉक्स में लिखें ताकि हम समय रहते आपकी मदद करने की कोशिश कर सकें।

म्यूचुअल फंड में पहली बार निवेश करने जा रहे हैं तो भूल कर भी न करें ये गलतियां वरना डूब जाएगा पैसा

म्यूचुअल फंड के नए निवेशक सबसे बड़ी गलती फंड के पिछले रिटर्न को देख कर निवेश करने में करते हैं.पिछले रिटर्न को देख कर यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि आगे फंड कैसा प्रदर्शन करेगा.

म्यूचुअल फंड में पहली बार निवेश करने जा रहे हैं तो भूल कर भी न करें ये गलतियां वरना डूब जाएगा पैसा

The redeemed proceeds would be subject to capital gains tax (short-term or long-term) depending on the holding period.

How to Invest in mutual funds : म्यूचुअल फंड में निवेश धैर्य और जोखिम की बेहतर समझ की मांग करता है. अगर आप म्यूचुअल फंड में पहली बार निवेश करने जा रहे हैं तो कुछ बातों को समझ लेना बेहद जरूरी है. हालांकि म्यूचुअल फंड में निवेश ऑप्शन की भरमार और बाजार के मौजूदा हालात को देखते हुए सही फंड का चुनाव आसान नहीं है. फिर भी म्यूचुअल फंड में निवेश से जुड़ी कुछ बुनियादी सावधानियों को ध्यान में रखेंगे तो आपको घाटा नहीं होगा.

पिछला रिटर्न बेहतर रिजल्ट की गारंटी नहीं

म्यूचुअल फंड (Mutual funds) के नए निवेशक सबसे बड़ी गलती फंड के पिछले रिटर्न को देख कर निवेश करने में करते हैं. पिछले रिटर्न को देख कर यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि आगे फंड कैसा प्रदर्शन करेगा. इसके अलावा मार्केट में सही वक्त पर एंट्री भी एक अहम पहलू है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर निवेशक को बाजार का पहले से अनुभव है तो म्यूचुअल फंड्स में वह लंबे समय तक बना रहता है.

स्थापित कंपनियों के पोर्टफोलियो के साथ निवेश करें

नए निवेशकों के लिए जरूरी है कि शुरू में स्थापित कंपनियों के फंड में निवेश करें. उनके पोर्टफोलियो पर गौर करें और फिर निवेश का फैसला लें. म्यूचुअल फंड में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाएं. इसका सबसे अच्छा उपाय एसआईपी ( SIP) के जरिये निवेश करना है. बाजार कैसी भी हालत में हो Systematic Investment Plan यानी एसआईपी के जरिये निवेश सबसे अच्छा तरीका है.

LIC की जबरदस्‍त रिटर्न देने वाली 3 स्‍कीम, 1 लाख का निवेश बन गया 18.50 लाख, SIP करने वाले भी बने अमीर

शेयर बाजार के मौजूदा हालात में नए निवेशकों की रणनीति

शेयर बाजार अब तक के सर्वोच्च स्तर पर है. ऐसे में म्यूचुअल फंड के नए निवेशकों को इंडेक्स या लार्ज कैप फंड (Large Cap Mutual funds) में निवेश करना चाहिए. उन्हें मिड-कैप (Mid Cap) और स्मॉल कैप (Small Cap) में निवेश से बचना चाहिए क्योंकि बाजार के उतार-चढ़ाव में ये बुरी तरह प्रभावित होते हैं. अगर कोई निवेशक आज की तारीख में एसआईपी के जरिये म्यूचुअल फंड में 10 हजार रुपये निवेश करना चाहता है तो उसे एक इंडेक्स फंड (Index fund), एक फ्लैक्सी कैप (Flexi Cap fund ) फंड और एक वैल्यू फंड ( Value fund) का चुनाव करना चाहिए ताकि उन्हें डाइवर्सिफिकेशन का फायदा मिल सके.

म्यूचुअल फंड में निवेश लंबी अवधि के लिए सही है

म्यूचुअल फंड में निवेश छोटी नहीं लंबी अवधि में ही फायदेमंद साबित होता है. सही रिटर्न के लिए सात से दस साल तक समय देना पड़ता है. ज्यादातर निवेश एक साल में ही बेहतर रिटर्न क्या म्यूच्यूअल फंड्स में ऑनलाइन निवेश करना सुरक्षित है की उम्मीद रखते हैं. लेकिन इतनी कम अवधि का रिटर्न देख कर म्यूचुअल फंड में निवेश की रणनीति बनाना ठीक नहीं है.

बैलेंस्ड एडवांटेज फंड में निवेश क्या म्यूच्यूअल फंड्स में ऑनलाइन निवेश करना सुरक्षित है से हो सकता है फायदा

विशेषज्ञों के मुताबिक बैलेंस्ड एडवाइंटेज फंड नए निवेशकों के लिए सही रणनीति हो सकता है. बैलेंस्ड एडवांटेज फंड को डायनैमिक एसेट एलोकेशन फंड भी कहा जाता है. इसमें मार्केट कंडीशन के आधार पर 30 से 80 फीसदी इक्विटी एलोकेशन किया जाता है. अगर कोई नया निवेशक लंबी अवधि निवेश की योजना बनाता है तो भी उसे बैलेंस्ड एडवांटेज फंड में ही निवेश की सलाह दी जाती है.

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New Mutual Fund rules from 1st October 2022: एक अक्टूबर से नॉमिनेशन डिटेल या यह डिक्लेरेशन देना जरूरी होगा

म्यूचुअल फंड के नियमों में बदलाव

New rules in Mutual Fund from 1st October 2022: खबरों के अनुसार म्यूचुअल फंड से संबंधित नियमों में शीघ्र ही बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अगले महीने यानी अक्टूबर की पहली तारीख से और उसके बाद म्यूचुअल फंड के लिए सब्सक्राइब करने वाले निवेशकों को अपना नॉमिनेशन विवरण भरना अनिवार्य होगा। अगर कोई निवेशक नॉमिनेशन डिटेल विवरण नहीं भरना चाहते, तो उन्हें एक डिक्लेरेशन फार्म भर कर उसमें यह घोषणा करनी होगी कि वे नॉमिनेशन यानी किसी को नामित करने की सुविधा नहीं लेना चाहते।

नामिनेशन फार्म या डिक्लेरेशन फार्म कैसे भरें

एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के लिए निवेशक की जरूरतों के अनुसार भौतिक या ऑनलाइन तरीके से नॉमिनेशन फॉर्म या डिक्लेरेशन फॉर्म का विकल्प देना अनिवार्य होगा। भौतिक विकल्प में फॉर्म पर निवेशक को हस्ताक्षर करने होंगे, जबकि ऑनलाइन फॉर्म के लिए क्या म्यूच्यूअल फंड्स में ऑनलाइन निवेश करना सुरक्षित है निवेशक ई-साइन की सुविधा का इस्तेमाल कर सकेंगे। अगर कोई एसेट मैनेजमेंट कंपनी अपने ग्राहकों के लिए ऑनलाइन सबमिशन की सुविधा उपलब्ध कराना चाहती है, तो उसका क्या म्यूच्यूअल फंड्स में ऑनलाइन निवेश करना सुरक्षित है सत्यापन टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) यानी दो चरण के पुष्टिकरण द्वारा करना होगा। इनमें एक कारक होगा ग्राहक के पंजीकृत मोबाइल नंबर या ईमेल पर भेजा गया वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी), जिसे भरकर सबमिशन की पुष्टि की जा सकेगी।

पहले इन नियमों को 1 अगस्त 2022 से लागू किया जाना था, मगर बाद में इसे पहली अक्टूबर से लागू करने का निर्णय लिया गया था और डेडलाइन को 1 अक्टूबर 2022 तक बढ़ा दिया गया था। जुलाई में बाजार नियामक सेबी ने म्यूचु्अल फंड धारकों के लिए नॉमिनी के विवरण से संबंधित नियमों को लागू किये जाने पर रोक लगा दी थी। जिसके कारण म्यूचुअल फंड के निवेशकों को नॉमिनी देने या नॉमिनेशन छोड़ने का विकल्प नहीं मिल रहा था।

एसेट मैनेजमेंट कंपनियों द्वारा नॉमिनेशन फॉर्म या इससे बाहर रहने के घोषणा पत्र को दो चरणों में सत्यापित किया जाएगा। निवेशक के रजिस्टर्ड ई-मेल या मोबाइल फोन नंबर पर एक ओटीपी भेजा जाएगा। इसलिए सभी निवेशकों को अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर या ई-मेल की एक बार फिर से जांच कर यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि एसेट मैनेजमेंट कंपनी के पास उनका सही मोबाइल नंबर या ई-मेल पंजीकृत है।

सेबी ने इस नियम को इसलिए लागू किया है कि सिक्योरिटी मार्केट के सभी निवेश विकल्पों से जुड़े नियमों में एकरूपता लाई जा सके। 2021 में सेबी ने ट्रेडिंग और डीमैट के लिए नए खाता खुलवाने वाले निवेशकों को भी ऐसा ही विकल्प उपलब्ध करवाया था। इसके अलावा सेबी ने कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट के बेहतर विनियमन और सभी जारीकर्ताओं व अन्य शेयरधारकों को एक ही जगह पर एकत्र किए कए सभी लागू नियमों तक पहुंच देने के लिए एक ऑपरेशनल सर्कुलर भी जारी किया था। आशा की जा रही है कि इस नियम के लागू होने से शेयर बाजार के नियमों में एकरूपता आएगी।

ICICI Prudential Value Discovery Fund 2022

New rules in Mutual Fund from 1st October 2022: खबरों के अनुसार म्यूचुअल फंड से संबंधित नियमों में शीघ्र ही बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अगले महीने यानी अक्टूबर की पहली तारीख से और उसके बाद म्यूचुअल फंड के लिए सब्सक्राइब करने वाले निवेशकों को अपना नॉमिनेशन विवरण भरना अनिवार्य होगा। अगर कोई निवेशक नॉमिनेशन डिटेल विवरण नहीं भरना चाहते, तो उन्हें एक डिक्लेरेशन फार्म भर कर उसमें यह घोषणा करनी होगी कि वे नॉमिनेशन यानी किसी को नामित करने की सुविधा नहीं लेना चाहते।

नामिनेशन फार्म या डिक्लेरेशन फार्म कैसे भरें

एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के लिए निवेशक की जरूरतों के अनुसार भौतिक या ऑनलाइन तरीके से नॉमिनेशन फॉर्म या डिक्लेरेशन फॉर्म का विकल्प देना अनिवार्य होगा। भौतिक विकल्प में फॉर्म पर निवेशक को हस्ताक्षर करने होंगे, जबकि ऑनलाइन फॉर्म क्या म्यूच्यूअल फंड्स में ऑनलाइन निवेश करना सुरक्षित है के लिए निवेशक ई-साइन की सुविधा का इस्तेमाल कर सकेंगे। अगर कोई एसेट मैनेजमेंट कंपनी अपने ग्राहकों के लिए ऑनलाइन सबमिशन की सुविधा उपलब्ध कराना चाहती है, तो उसका सत्यापन टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) यानी दो चरण के पुष्टिकरण द्वारा करना होगा। इनमें एक कारक होगा ग्राहक के पंजीकृत मोबाइल नंबर या ईमेल पर भेजा गया वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी), जिसे भरकर सबमिशन की पुष्टि की जा सकेगी।

पहले इन नियमों को 1 अगस्त 2022 से लागू किया जाना था, मगर बाद में इसे पहली अक्टूबर से लागू करने का निर्णय लिया गया था और डेडलाइन को 1 अक्टूबर 2022 तक बढ़ा दिया गया था। जुलाई में बाजार नियामक सेबी ने म्यूचु्अल फंड धारकों के लिए नॉमिनी के विवरण से संबंधित नियमों को लागू किये जाने पर रोक लगा दी थी। जिसके कारण म्यूचुअल फंड के निवेशकों को नॉमिनी देने या नॉमिनेशन छोड़ने का विकल्प नहीं मिल रहा था।

एसेट मैनेजमेंट कंपनियों द्वारा नॉमिनेशन फॉर्म या इससे बाहर रहने के घोषणा पत्र को दो चरणों में सत्यापित किया जाएगा। निवेशक के रजिस्टर्ड ई-मेल या मोबाइल फोन नंबर पर एक ओटीपी भेजा जाएगा। इसलिए सभी निवेशकों को अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर या ई-मेल की एक बार फिर से जांच कर यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि एसेट मैनेजमेंट कंपनी के पास उनका सही मोबाइल नंबर या ई-मेल पंजीकृत है।

सेबी ने इस नियम को इसलिए लागू किया है कि सिक्योरिटी मार्केट के सभी निवेश विकल्पों से जुड़े नियमों में एकरूपता लाई जा सके। 2021 में सेबी ने ट्रेडिंग और डीमैट के लिए नए खाता खुलवाने वाले निवेशकों को भी ऐसा ही विकल्प उपलब्ध करवाया था। इसके अलावा सेबी ने क्या म्यूच्यूअल फंड्स में ऑनलाइन निवेश करना सुरक्षित है कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट के बेहतर विनियमन और सभी जारीकर्ताओं व अन्य शेयरधारकों को एक ही जगह पर एकत्र किए कए सभी लागू नियमों तक पहुंच देने के लिए एक ऑपरेशनल सर्कुलर भी जारी किया था। आशा की जा रही है कि इस नियम के लागू होने से शेयर बाजार के नियमों में एकरूपता आएगी।

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