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मुद्रा लोन में कितना सब्सिडी मिलता है

मुद्रा लोन में कितना सब्सिडी मिलता है : आप सभी जानते हैं कि सरकार देश के नागरिकों को लाभ पहुंचाने के लिए कई प्रकार की योजना चला रहे हैं। सरकार जो छोटे व्यापारी होते हैं उनको अपना खुद का व्यवसाय करने के लिए या व्यवसाय को बढ़ाने के लिए लोन योजना चला रहे हैं। इस योजना का नाम प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना है। इस योजना के अंतर्गत लोन लेने पर सरकार उन नागरिकों को सब्सिडी प्रदान करते हैं। तो आप इस आर्टिकल से मुद्रा लोन में कितना सब्सिडी मिलता है इसकी पूरी जानकारी अवलोकन करके ले सकते हैं।

प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना के माध्यम से सरकार व्यापारियों को लोन प्रदान करते हैं जिसमे सब्सिडी प्रदान किया जाता है। इससे जो व्यापारी होते हैं उनको व्यवसाय करने में आसानी होती है या वे अपने व्यवसाय को बढ़ा सकते हैं। मुद्रा योजना में सरकार नागरिकों को 70 से 80 फीसदी सब्सिडी प्रदान करते हैं। अगर आप इसका लाभ लेना चाहते हैं तो इस योजना में आवेदन करके सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए आवेदन करने की प्रक्रिया नीचे दिया गया है इससे आप पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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मुद्रा लोन में कितना सब्सिडी मिलता है ?

सरकार मुद्रा लोन योजना के अंतर्गत छोटे व्यवसाय करने वाले नागरिकों को लोन देते हैं। अब इस योजना से आप 70 – 80 फीसदी सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए आपको आवेदन करने की प्रक्रिया नीचे दिया गया है , आप इसमें आवेदन करके सब्सिडी ले सकते हैं।

  • अगर आप मुद्रा योजना के तहत लोन लेना चाहते हैं तो आपको आवेदन करके लिए लिए सबसे पहले इसके ऑफिशियल वेबसाइट पर जाना होगा।
  • अब आपके सामने इसका होम पेज ओपन होगा जिसमे आपको सबसे नीचे जाना है।
  • उसके बाद आपको नीचे तीन विकल्प मिलेंगे Shishu , Kishor और Tarun जिसमे से आप जितंना लोन लेना चाहते हैं उसे सिलेक्ट करें।
  • जैसे शिशु लोन को सिलेक्ट करते हैं तो आपके सामने अगला पेज ओपन होगा।
  • उसमे आपको Application Form For Shishu के आगे दिए Download के लिंक को सिलेक्ट करें।
  • अब प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का फॉर्म डाउनलोड हो जाएगा उसका आप प्रिंटआउट निकाल लें।
  • उसके बाद फॉर्म में पूछी गई सभी जानकारी भरें और साथ ही दस्तावेजों को भी अटैच कर दें।
  • अब फॉर्म को दस्तावेजों के साथ बैंक में जमा कर दें जहाँ मुद्रा लोन दिया जाता हो।
  • इस प्रकार आपका आवेदन पूरा हो जायेगा और सत्यापन के बाद लोन मिल जायेगा।

सारांश -:

मुद्रा लोन में सब्सिडी प्राप्त करने के लिए पहले आप सरकार की वेबसाइट mudra.org.in को ओपन करें। इसके बाद शिशु को सिलेक्ट करें। फिर Download को सिलेक्ट करें। इसके बाद फॉर्म का प्रिंटआउट निकाल लें। फॉर्म में पूछे गए सभी जानकारी भरें। इसके बाद दस्तावेजों को अटैच कर दें। फिर फॉर्म को बैंक में जाकर जमा कर दें। इस प्रकार आप प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से सब्सिडी ले सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न ( FAQ )

इस योजना के माध्यम से सरकार छोटे व्यवसाय शुरू करने वाले नागरिकों को लोन प्रदान करते हैं। इससे वे अपना करोबार बढ़ा सकते हैं या अपना नया बिजनेस शुरू कर सकते हैं।

इस योजना के माध्यम से लोन लेने वाले नागरिकों को 70-80 फीसदी सब्सिडी सरकार द्वारा दिया जाता है।

पीएम मुद्रा योजना का फॉर्म आप इसके वेबसाइट mudra.org.in में जाकर डाउनलोड कर सकते हैं। इस आर्टिकल में इसकी जानकारी दिया है।

मुद्रा लोन में कितना सब्सिडी मिलता है , इसकी सभी जानकारी हमने आपको इस आर्टिकल में विस्तार से दिया है जिससे आप आसानी से लोन में सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं। इससे नागरिकों को बिजनेस करने में आसानी होती है तो आप भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं।

हमने आपको मुद्रा लोन सब्सिडी की जानकारी इस आर्टिकल के माध्यम से दे दिया है , उम्मीद है आपको सभी जानकारी अच्छे से समझ आई मुद्रा का व्यापारी कौन है? होगी। आपको ऐसी और भी जानकारी इस वेबसाइट से मिल जाएगी। इस आर्टिकल को अवलोकन के बाद शेयर अवश्य करें , धन्यवाद।

निम्नलिखित में वह वर्ग कौन है जिसको मुद्रा स्फीति के कारण सबसे अधिक हानि होती है -

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आरबीआई ने विदेशी मुद्रा लेनदेन पर जारी किए निर्देश, बैंक जल्द कर लें जोखिम से बचाव के उपाय

RBI ने कहा है कि ईसीएआई द्वारा प्रकटीकरण के बिना बैंक ऋण रेटिंग बैंकों द्वारा पूंजी गणना के लिए योग्य नहीं होगी. बैंक ऐसे एक्सपोजर को अनारक्षित मानेंगे. जिन इकाइयों ने विदेशी मुद्रा में लेन-देन के लिये जोखिम से बचाव के उपाए नहीं किये हैं, उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई)

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई)

gnttv.com

  • नई दिल्ली,
  • 11 अक्टूबर 2022,
  • (Updated 11 अक्टूबर 2022, 9:30 PM IST)

इसका मकसद विदेशी मुद्रा बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव से होने वाले नुकसान को कम करना है.

संशोधित नियम 1 जनवरी, 2023 से प्रभावी होंगे

भारतीय रिजर्व बैंक ने किसी भी इकाई के पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए बगैर विदेशी मुद्रा में लेन-देन को लेकर बैंकों के लिए अपने कुछ दिशानिर्देशों में बदलाव किया है. इसका मकसद विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव से होने वाले नुकसान को कम करना है. आरबीआई मुद्रा का व्यापारी कौन है? ने मंगलवार को एक विज्ञप्ति में कहा कि बैंकों को उन सभी प्रतिपक्षकारों के बिना हेज्ड विदेशी मुद्रा एक्सपोजर का आकलन करने की आवश्यकता होगी, जिनके पास किसी भी मुद्रा का एक्सपोजर है.

एसपीडी को प्रथम श्रेणी अधिकृत डीलरों की तरह उपयोगकर्ताओं को विदेशी मुद्रा बाजार की सभी सुविधाएं प्रदान करने की अनुमति देने का निर्णय लिया गया है. यह अनुमति नियमों और अन्य दिशानिर्देशों के अधीन है.

इस साल अब तक डॉलर के मुकाबले रुपया लगभग 11% गिरा है और हाल के हफ्तों में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. आरबीआई ने कहा कि बैंकों को कम से कम सालाना सभी संस्थाओं के विदेशी मुद्रा एक्सपोजर (एफसीई) का पता लगाना होगा. संशोधित नियम 1 जनवरी, 2023 से प्रभावी होंगे. आरबीआई के अनुसार यदि किसी इकाई के यूएफसीई से संभावित नुकसान 75% से अधिक है, तो बैंकों को उस इकाई के लिए कुल जोखिम भार में 25 प्रतिशत अंक की वृद्धि प्रदान करने की आवश्यकता होगी.

आरबीआई ने कहा कि "जिन इकाइयों ने विदेशी मुद्रा में लेन-देन के लिये जोखिम से बचाव के उपाए नहीं किये हैं, उन्हें विदेशी विनिमय दरों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव के दौरान काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है. ये बैंकिंग प्रणाली से लिए गए ऋणों को चुकाने की उनकी क्षमता को कम कर सकते हैं और उनके डिफ़ॉल्ट की संभावना को बढ़ा सकते हैं, जिससे बैंकिंग प्रणाली के स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा.''

मुद्रा का व्यापारी कौन है?

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Q. Consider the following statements:
1. Real exchange rate denotes the actual purchasing power of a currency with respect to another currency
2. Nominal exchange rate does not take inflation into account
3. Exchange rates cannot be fixed by governments
Which of the statements given above are correct?

Q. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. वास्तविक विनिमय दर एक मुद्रा के अन्य मुद्रा के सापेक्ष वास्तविक क्रय शक्ति को दर्शाती है।
2. सांकेतिक विनिमय दर में मुद्रास्फीति पर विचार नहीं किया जाता है।
3. विनिमय दरों को सरकारों द्वारा तय नहीं किया जा सकता है।
ऊपर दिए गए कौन से कथन सही हैं?

मुद्रा का व्यापारी कौन है?

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है, जो अपने सदस्य देशों की वैश्विक आर्थिक स्थिति पर नज़र रखने का काम करती है। यह अपने सदस्य देशों को आर्थिक और तकनीकी सहायता प्रदान करती है। यह संगठन अंतर्राष्ट्रीय विनिमय दरों को स्थिर रखने के साथ-साथ विकास को सुगम करने में सहायता करता है। इसका मुख्यालय वॉशिंगटन डी॰ सी॰, संयुक्त राज्य में है।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष: उद्देश्य

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय वित्तीय एवं मौद्रिक स्थिरता को बनाये रखने के उपाय करना तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार के विस्तार एवं पुनरुत्थान हेतु वित्तीय आधार उपलब्ध कराना, आर्थिक प्रगति को बढ़ावा देना, गरीबी कम करना, रोजगार को बढ़ावा देना और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सुविधाजनक बनाना है।

इसके अतिरिक्त अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के उद्देश्यों में एक स्थायी संस्था (जो अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक समस्याओं पर सहयोग व परामर्श हेतु एक तंत्र उपलब्ध कराती है) के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक सहयोग को बढ़ावा देना, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के विस्तार एवं संतुलित विकास को प्रोत्साहित करना तथा इस प्रकार से सभी सदस्यों के उत्पादक संसाधनों के विकास और रोजगार व वास्तविक आय के उच्च स्तरों को कायम रखना; विनिमय स्थिरता को प्रोत्साहित करना तथा सदस्यों के बीच व्यवस्थित विनिमय प्रबंधन को बनाये रखना; सदस्यों के मध्य चालू लेन-देन के संदर्भ में भुगतानों की एक बहुपक्षीय व्यवस्था की स्थापना में सहायता देना; सदस्यों को अस्थायी कोष उपलब्ध कराकर उन्हें अपने भुगतान संतुलनों के कुप्रबंधन से निबटने का अवसर एवं क्षमता प्रदान करना तथा सदस्यों के अंतरराष्ट्रीय भुगतान संतुलनों में व्याप्त असंतुलन की मात्रा व अवधि को मुद्रा का व्यापारी कौन है? घटाना इत्यादि सम्मिलित हैं।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष: संक्षिप्त इतिहास
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की स्थापना जुलाई 1944 में सम्पन्न हुए संयुक्त राष्ट्र मौद्रिक एवं वित्तीय सम्मेलन में हस्ताक्षरित समझौते के अंतर्गत की गई, जो 27 दिसंबर, 1948 से प्रभावी हुआ। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा 1 मार्च, 1947 को औपचारिक रूप से कार्य करना शुरू कर दिंया गया। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष आर्थिक व सामाजिक परिषद के साथ किये गये एक समझौते (जिसे 15 नवंबर, 1947 को महासभा की मंजूरी प्राप्त हुई) के उपरांत संयुक्त राष्ट्र का विशिष्ट अभिकरण बन गया।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष: संरचना

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष एवं विश्व बैंक का एक संगठनात्मक ढांचा एक समान है।अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष एक बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स, बोर्ड ऑफ एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स, अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक प्रणाली पर एक अंतरिम समिति तथा एक प्रबंध निदेशक व कर्मचारी वर्ग के द्वारा अपना कार्य करता है।
बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की सभी शक्तियां बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में निहित होती हैं। इस बोर्ड में प्रत्येक सदस्य देश का एक गवर्नर एवं एक वैकल्पिक प्रतिनिधि शामिल रहता है। इसकी बैठक वर्ष में एक बार होती है।

बोर्ड ऑफ एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स: बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा अपनी अधिकांश शक्तियां 24 सदस्यीय कार्यकारी निदेशक बोर्ड को हस्तांतरित कर दी गयी हैं। इस कार्यकारी निदेशक बोर्ड की नियुक्तियां निर्वाचन सदस्य देशों या देशों के समूहों द्वारा किया जाता है। प्रत्येक नियुक्त निदेशक को अपनी सरकार के निर्धारित कोटे के अनुपात में मत शक्ति प्राप्त होती है। जबकि प्रत्येक निर्वाचित निदेशक अपने देश समूह से सम्बद्ध सभी वोट डाल सकता है।
प्रबंध निदेशक: कार्यकारी निदेशकों द्वारा अपने प्रबंध निदेशक का चयन किया जाता है, जो कार्यकारी बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में कार्य करता है। प्रबंध निदेशक अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के दिन-प्रतिदिन के कार्यों को सम्पन्न करता है। एक संधि समझौते के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का प्रबंध निदेशक यूरोपीय होता है जबकि विश्व बैंक का अध्यक्ष अमेरिकी नागरिक होता है।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष: कार्य
अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष के कार्य इस प्रकार है:
1 आईएमएफ की स्थापना के समय, इसके तीन प्राथमिक कार्य होते थे: देशों के बीच निश्चित विनिमय दर की व्यवस्था की निगरानी करना, इस प्रकार राष्ट्रीय सरकारों ने अपने विनिमय दरों का प्रबंधन करने और इन सरकारों को आर्थिक विकास को प्राथमिकता देने की अनुमति दी, अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संकटों को फैलाने से रोकने के लिए सहायता करना था । महामंदी और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के टुकड़ों को सुधारने में आईएमएफ का भी इरादा था। साथ ही, आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे जैसे परियोजनाओं के लिए पूंजी निवेश प्रदान करना।
2 अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष वैश्विक विकास और आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए काम करता है, जिससे वे विकासशील देशों के साथ काम कर, नीतिगत, सलाह और सदस्यों को वित्तपोषण करके व्यापक आर्थिक स्थिरता हासिल करने और गरीबी को कम करने में मदद करते हैं।
3 अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष वित्तपोषण के वैकल्पिक स्रोत प्रदान करता है।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष एवं भारत
भारत का अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष से घनिष्ठ संबंध रहा है और उसके नीति-निर्माण एवं कार्य संचालन में भारत निरंतर योगदान देता रहा है। समय-समय पर आर्थिक सहायता और परामर्श द्वारा भारत मुद्रा कोष से लाभान्वित हुआ है।भारत, जो अभी तक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से समय-समय पर अपनी आवश्यकतानुसार ऋण लेता रहा है, अब इसके वित्त पोषक राष्ट्रों में शामिल हो गया है। अब भारत इस बहुपक्षीय संस्था को ऋण उपलब्ध कराने लगा है।

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